विष के दांत

‘विष के दांत’ शीर्षक पाठ का सारांश लिखें।

– ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी नलिन विलोचन शर्मा जी की प्रसिद्ध रचना है। प्रस्तुत पाठ ‘विष के दांत तथा अन्य कहानियां’ नामक कहानी संग्रह से लिया गया है। इस कहानी के माध्यम से समाज के मध्यम वर्गीय परिवारों का अंतर्विरोध व्यापक रूप से उजागर होता है। सेन साहब का संबंध यद्यपि मध्यम वर्ग से हैं परन्तु आर्थिक सम्पन्नता के कारण वे स्वयं को किसी सामंत से कम नहीं समझते हैं। संतान के रूप में उसे पांच सुसभ्य लड़कियां और एक दुर्ललित लड़का हैं। लड़कियों के लिए घर में अलग नियम हैं जिसका सख्ती से पालन कराया जाता है परन्तु लड़का इकलौता होने के कारण अपवादस्वरूप है। सेन साहब के द्वारा शिक्षा-दीक्षा में भी भेदभाव किया गया है, लड़कियों को जहां सामान्य स्कूली शिक्षा दी जा रही है वहीं लड़का के लिए कारखाने के बढ़ई मिस्त्री के साथ ठोंक-पीट जैसी प्रायोगिक शिक्षा तय की गई है, क्योंकि खोखा को वे इंजीनियर बनाना चाहते हैं।
अपने मित्रों के साथ बातचीत के दौरान सेन साहब अक्सर खोखा को इंजीनियर बनाने की बात करते हैं।एक बार सेन साहब के मित्रमंडली में एक साधारण हैसियत के पत्रकार महोदय भी अपने पुत्र के साथ मौजूद थे, सो उससे किसी ने पूछ दिया… कि अपने पुत्र के बारे में उनका क्या ख्याल है? पत्रकार महोदय कुछ जवाब देते सेन साहब उससे पहले ही बोलने लगे “मैं तो अपने खोखा को इंजीनियर बनाने जा रहा हूं।” जब पत्रकार महोदय से पुनः पूछा गया तो उसने कहा कि ” मैं चाहता हूं कि पहले वह भद्रजन जरुर बने इसके बाद जो कुछ बनना चाहे, उसमें उसे पूरी आजादी रहेगी।” पत्रकार महोदय के इस गुप्त व्यंग्य से सेन साहब ऐंठकर यानि मन मसोस कर रह गए।तभी बाहर शोर-गुल सुनकर सेन साहब उठने लगे उसे उठते देख मित्रों ने भी निकलने की इच्छा जताई और उन्हीं के साथ बाहर आ गए। बाहर सेन साहब का ड्राइवर एक औरत और उसके पांच-छह साल के लड़का से उलझ रहा था। लड़का बार-बार ड्राइवर की ओर झपट रहा था जबकि उसकी मां उसे रोक रही थी। सेन साहब को देखकर औरत सहमते हुए अपने बेटे मदन को लेकर वहां से चली जाती है। सभी मित्रों के चले जाने के बाद सेन साहब ने मदन के पिता गिरधरलाल को अपने बेयरा यानि खाना खिलाने वाला सेवक के द्वारा बुलावा भेजा।
मदन के पिता गिरधरलाल सेन साहब की फेक्ट्री में एक साधारण किरानी था सो बिना देर किए वह सेन साहब के सामने सिर झुकाकर खड़ा हो गया। सेन साहब ने मदन के बारे में कई सारी उल्टी-सीधी बातें कही और उसे समय रहते सुधारने की चेतावनी दी। उस रात गिरधरलाल द्वारा मदन की ऐसी पिटाई हुई कि उसके करुण चीत्कार से सेन साहब का शांत शयनकक्ष गूंज उठा।
लेकिन अगले दिन शाम के समय मामला बिल्कुल बेढव हो गया। काशू यानि खोखा अपने बंगले के बगल वाली गली में वहां जा पहुंचा जहां मदन अपने आवारगर्द दोस्तों के साथ लट्टू नचा रहा था। मदन को लट्टू नचाता देख उसका मन भी मचल गया परन्तु आदत से लाचार खोखा आग्रह की बजाय रौबदार आवाज में कहा कि ‘हमको लट्टू दो, हम भी खेलेगा।’ दूसरे लड़के को कोई दिक्कत नहीं थी परन्तु एक दिन पहले ही अपमान का घूंट पीने वाला मदन को ये कैसे मंजूर होता, सो उसने कहा ‘अबे भाग जा यहां से ! बड़ा आया है लट्टू नचाने वाला ! है भी लट्टू तेरे ! जा, अपने बाबा के मोटर पर बैठ।’ इतना सुनते ही काशू तैश में आ गया और मदन को एक घूंसा रशीद कर दिया। सेन साहब के अनुसार चोर, गुंडा और डाकु बनने वाला मदन भी कहां मानने वाला था ! उसने भी ऐसी पलटवार की कि काशू को वहां से मिनट भर में जान बचाकर भागना पड़ा।
लड़ाई खत्म होते ही सभी अपने-अपने घर चले गए परन्तु मदन रात में घर नहीं लौटा। लेकिन जाता कहां? जब तेज भूख लगी तो देर रात बगल वाली गली के रास्ते किसी तरह घर के अंदर प्रवेश किया और रसोई में जाकर भरपेट भोजन किया। भोजन करने के बाद वह माता-पिता की बातचीत सुनने लगा जहां उसके पिता जी बोल रहे थे कि ‘सेन साहब ने कहा कि कल से तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है, अपनी तनख्वाह ऑफिस से ले जाना।’ इतना सुनकर मदन बरामदे पर रखे चारपाई पर सोने के लिए जाने लगा। इस दौरान अंधेरे में मदन का पैर लोटे से टकरा गया , जिसकी आवाज सुनकर गिरधरलाल बाहर आ गए परन्तु वह मदन को मारने के बजाय गोदी में उठाकर कहने लगा, ‘शाबाश बेटा’ ! एक तेरा बाप है और एक तू ! बे खोखा के दो-दो दांत तोड़ डाले। इस तरह गिरधरलाल अन्याय के विरुद्ध मदन के प्रबल प्रतिकार की भूरी-भूरी प्रशंसा करने लगे और मदन अचरज भरी निगाहों से अपने पिता को देखे जा रहा था।

विष के दांत पाठ का मुहावरा और उसका अर्थ:-

नाज़ होना ——— अभिमान होना
शामत आना ——– बुरे दिन आना / बुरा समय आना
सख्त ताकीद  —– कठोर आदेश/ सख्त चेतावनी
जीती – जागती मूरत होना —— बिल्कुल हुबहु मिलना
कठपुतली होना ——— किसी के इशारे पर नाचना
किलकारी मारना —– ठहाके लगाना
आंखों का तारा ———– बहुत प्यारा/अत्यंत प्यारा
ऐंठकर रह जाना ——— मन मसोस कर रह जाना/ मन मारकर रह जाना
सहम जाना — भयभीत हो जाना
रुखसत होना ————- चले जाना
हुक्म देना ———- आदेश देना
खाल उधेड़ना —— बहुत मारना
नींद उचटना —- नींद का दूर होना
खीझ आना ——– मन-ही-मन गुस्सा आना 
तबीयत मचलना ——- मन हो जाना
ललक जाना — प्रबल इच्छित होना
आदत से लाचार होना — आदतन मजबूरी का शिकार होना
तैश में आना ————– गुस्सा में आना
हाथ चला देना — मार बैठना
आव देखा न ताव – बिना सोचे-समझे
घूँसा रसीद करना —- घूँसा मारना / मुक्का मारना
टुट पड़ना —– एकाएक हमला करना/धावा बोलना
तितर – बितर होना ——- बिखर जाना
मारा – मारा फिरना — बेकार का इधर-उधर घूमना
ताज्जुब होना — आश्चर्य होना
दांत भींच लेना ——– पूर्ण रूप से तैयार हो जाना
हक्का – बक्का रह जाना —— आश्चर्यचकित रह जाना
ठिठक जाना ———- एकाएक ठहर जाना

विष के दांत पाठ का संधि – विच्छेद :-

दुर्ललित का संधि-विच्छेद क्या होता है?

– दु: + ललित

दूरंदेशी का संधि-विच्छेद क्या होता है?

– दूर + अंदेशी

नमस्कार का संधि – विच्छेद क्या होता है?

– नमः + कार

दुर्दमनीय का संधि – विच्छेद क्या होता है?

– दु: + दमनीय

निस्सहाय का संधि – विच्छेद क्या होता है?

– नि: + सहाय

निष्ठुरता का संधि – विच्छेद क्या होता है?

– नि: + स्थुरता

उल्लास का संधि – विच्छेद क्या होता है?

– उत् + लास

विष के दांत शीर्षक पाठ का कठिन शब्द एवं शब्दार्थ:-

बरसाती —– मकान आदि के सामने बना छतदार बरामदा
नाज – गर्व / अभिमान/घमंड
फटकना – निकट आना
धब्बा — दाग  
क्लीनर – सफाईकर्मी
शोफर — ड्राइवर/चालक
शामत — दुर्भाग्य/ विपत्ति
सख्त — कठिन
ताकीद — निर्देश/चेतावनी
सुशील — सुंदर स्वभाववाला
तहजीब — सभ्यता
तमीज — शिष्टाचार
मिस्टर — श्रीमान
मिसेज — श्रीमती
तालीम — शिक्षा
वक्त — समय
सेहत — स्वास्थ्य
सोसायटी — शिष्ट समाज / भद्रलोक / भद्र समाज
तालिकाएं — अदाकाराएं
रश्क — ईर्ष्या / जलन / डाह
खास – विशेष
नाउम्मीद – आशाहीन
ताल्लुक – संबंध
हकीकत – वास्तविकता/सच्चाई
आविर्भाव – जन्म / उत्पत्ति
अपवाद – नियम विरुद्ध
लक्षण – गुणधर्म
दुर्ललित — दुलार से बिगड़ा हुआ  
भड़कीले – भव्य
अभाव — कमी
चर्चा — वाद-विवाद
ढंग – तरीका
मौलिकता — नवीनता
दूरंदेशी — दूरदर्शिता /समझदारी
ढंग — तरीका
ट्रेंड – प्रशिक्षित
फिजूल – व्यर्थ/अनावश्यक
बिजनेसमैन – व्यवसायी      
 इंजीनियर – अभियंता
किंडरगार्टन  — बालबाड़ी / बालोद्यान  
 बढ़ई – लकड़ी का काम करने वाला मिस्त्री
इंतजाम – व्यवस्था / प्रबंध
औजार – उपकरण
वाकिफ – परिचित / अवगत  
वाकया – घटना
ड्राइंग रूम – बैठक कक्ष / स्वागत कक्ष
गपशप – बातचीत
हैसियत – औकात/सामर्थ्य/धनबल
अखबारनवीस- पत्रकार
हरकत – गतिविधि
तारीफ – प्रशंसा
चुप – मौन
ख्याल – विचार
जेंटिलमैन – भद्रजन
आजादी – छुट/स्वतंत्रता
प्रच्छन्न – गुप्त / अप्रकट
व्यंग्य – कटाक्ष / उपहास
अलग – दूर
खामखाह – बेवजह/ बेमतलब
संयत – मर्यादित
पर – परन्तु
अदब – शिष्टता
मामूली – साधारण
शरारती – नटखट
हरदम – हमेशा
दिलचस्पी – अभिरुचि / झुकाव
शक – संदेह / शंका
भाव – भंगिमा —– हाव-भाव
झिझक — हिचक /संकोच
हिकमत — तरीका / तरकीब
बेयरा — भोजन कराने वाला सेवक  
किरानी — लिपिक/क्लर्क
अहाते – चारदीवारी
हुक्म — आदेश
जुर्म – अपराध
बेलौस – नि: स्वार्थ / साफ-सुथरा
शोख – ढीठ
खलल — बाधा / व्यवधान
झुंझलाकर — खीझकर/क्रोधित होकर
दवा – उपचार
कमबख्त — अभागा / बदकिस्मत
खाल – मोटा चमड़ा
कातर — भयाकुल/व्याकुल
बकबक — अनाप-शनाप बातें
आर्त — व्यथित
खैरियत — सौभाग्य
बेढब – अजीब / बेतरीका
मामला – घटना
नजरअंदाज — अनदेखी
जमात – समूह/समुदाय
रोब – धाक / दबदबा
उज्र — आपत्ति / दिक्कत
फायदा — लाभ
मंजूर — स्वीकार
मजाल — साहस
द्वंद्व युद्ध – सिर्फ दो व्यक्तियों का युद्ध या कुश्ती
अक्सर – प्रायः
मदद – सहायता / सहयोग
खिलाफ — विरुद्ध
अक्ल – समझ / बुद्धि  / ज्ञान
दुर्दमनीय — कठिनाई से दमन किय जानेवाला
आहिस्ता – धीरे
मामूली — साधारण/सामान्य
तनख्वाह — वेतन / पगार    
ऑफिस – कार्यालय
सजा – दंड
तजबीज —सलाह – मशविरा
निस्सहाय — बेसहारा        
मुमकिन — संभव

‘ विष के दाँत ‘ पाठ का प्रश्नोत्तर लिखे।

प्रश्न संख्या – 01

कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – साहित्यिक रचना के संदर्भ में शास्त्रीय विधान है कि उसके शीर्षक से सम्पूर्ण रचना का सामूहिक भाव प्रकट होना चाहिए। इसके अतिरिक्त ‘शीर्षक’ संक्षिप्त, उद्देश्य परक , आकर्षक और रहस्यात्मक गुणों से युक्त होना चाहिए।
इस दृष्टिकोण से विचार करने पर ‘विष के दाँत’ सर्वथा सार्थक और उपयुक्त शीर्षक है।

प्रश्न संख्या – 02

सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन – पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद – भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर – सेन साहब के परिवार में पाँच लड़कियां और एक लड़का सहित कुल छः संतान हैं। सेन साहब ने बच्चों के लिए घरेलू स्तर पर कुछ नियम तय किए थे जिसका पालन लड़कियों के लिए तो अनिवार्य था परन्तु खोखा की स्वेच्छा पर निर्भर था। लड़कियों के लिए सामान्य स्कूली शिक्षा जबकि खोखा के लिए कारखाने के बढ़ई मिस्त्री के साथ ठोंक-पीट जैसी प्रायोगिक शिक्षा तय की गई थी। बातचीत के क्रम में सेन साहब कभी लड़कियों के भविष्य की चर्चा नहीं करते परन्तु खोखा को इंजीनियर बनाने की बात बारम्बार दुहराते हैं।
इस प्रकार उक्त तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध होता है कि सेन साहब के परिवार में पालन -पोषण में लिंग आधारित भेद – भाव व्यापक स्तर पर किए जा रहे हैं।

प्रश्न संख्या – 03

खोखा किन मामलों में अपवाद था?

उत्तर – खोखा घर में बनें नियमों के साथ – साथ जीवन के नियम का भी अपवाद था क्योंकि उसका जन्म सेन दंपती की उस अवस्था में हुआ था जब उन्होंने संतान उत्पत्ति की उम्मीद छोड़ दी थी।

प्रश्न संख्या – 04

सेन दंपती खोखा में कैसी संभावनाएं देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने उसकी कैसी शिक्षा तय की थी?

उत्तर – सेन दंपती खोखा में इंजीनियर बनने की संभावनाएं देखते थे और उन संभावनाओं के लिए उन्होंने कारखाने की एक बढ़ई मिस्त्री के साथ ठोंक-पीट जैसी प्रायोगिक शिक्षा तय की थी।

प्रश्न संख्या – 05

सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

(क) लड़कियां क्या हैं, कठपुतलियां हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है।

– प्रस्तुत पंक्ति गोधूलि भाग -2 में संकलित ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी से लिया गया है, जिसके रचयिता हिन्दी कविता में प्रपद्यवाद के जनक नलिन विलोचन शर्मा जी है।
कहानीकार के द्वारा उक्त पंक्ति का प्रयोग सेन दंपती की लड़कियों के प्रसंग में किया गया है। सेन साहब की सभी बेटियां अनुशासन, आज्ञा पालन , पठन-पाठन आदि के स्तर पर शत प्रतिशत खरा है। बेटियों के इन्हीं विलक्षण गुणों पर मोहित होकर कहानीकार ने कहा कि ‘ लड़कियां क्या हैं, कठपुतलियां हैं और उनके माता-पिता को इस बात का गर्व है। वास्तव में ऐसे संतान पर गर्व होना स्वाभाविक है।

(ख) खोखा के दुर्ललित स्वभाव के अनुसार ही सेनों ने सिद्धांतों को भी बदल लिया था।

– प्रस्तुत पंक्ति गोधूलि भाग -2 में संकलित ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी से ग्रहण किया गया है, जिसके रचयिता हिन्दी कविता में प्रयोगवाद के प्रवर्तक नलिन विलोचन शर्मा जी है।
उक्त पंक्ति का प्रयोग सेन दंपती के इकलौते पुत्र खोखा के प्रसंग में हुआ है। कहानीकार के अनुसार पांच बेटियों के बाद खोखा का जन्म तब हुआ था जब सेन दंपती पुत्र – मोह से मुक्त हो चुके थे। सामान्य भारतीय दंपतियों की तरह सेन दंपती ने भी अपने इकलौते पुत्र का पालन अत्यधिक लाड़-प्यार से किया था।  इसी लाड़-प्यार ने खोखा को दुर्ललित बना दिया, सेन दंपती भी अब अपना सिद्धांत खोखा के अनुसार ही तय करते हैं। उनकी गलतियों पर उन्हें समझाने-बुझाने की बजाय उनकी बड़ाई करते हैं।
इस तरह सेन दंपती द्वारा सिद्धांतों से समझौता कर खोखा के भविष्य को ही असुरक्षित किया जा रहा है।

(ग) ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं।

– प्रस्तुत पंक्ति गोधूलि भाग -2 में संकलित ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी से लिया गया है, जिसके रचयिता हिन्दी कविता में प्रयोगवाद के प्रवर्तक नलिन विलोचन शर्मा जी है।
प्रस्तुत पंक्ति का प्रयोग मदन और ड्राइवर के बीच लड़ाई के प्रसंग में हुआ है। ड्राइवर की शिकायत पर सेन साहब ने मदन के पिता गिरधरलाल को बुलाया और मदन के बारे में उल्टी-सीधी बातें करते हुए कहा कि ऐसे ही लड़के आगे चलकर गुंडे, चोर और डाकू बनते हैं। अतः तुम उसे समय रहते सुधारने का प्रयास करो।
हालांकि मदन ने अपने ऊपर हुए अन्याय को सहन करने के बदले उसका प्रतिकार मात्र किया था। इसलिए सेन साहब की आंखों में वे खटकने लगे थे।

(घ) हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।

– प्रस्तुत पंक्ति गोधूलि भाग -2 में संकलित ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी से लिया गया है, जिसके रचयिता हिन्दी कविता में प्रयोगवाद के प्रवर्तक नलिन विलोचन शर्मा जी है।
प्रस्तुत पंक्ति का प्रयोग खेलकूद के प्रसंग में हुआ है। एक दिन मदन अपने आवारागर्द दोस्तों के साथ लट्टू नचा रहा था। मदन को लट्टू नचाते देख खोखा का मन भी मचल गया। खोखा के इस दशा को देखकर कहानीकार ने उस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि हंस कौओं की जमात में शामिल होने के लिए ललक गया।
प्रस्तुत पंक्ति में खोखा के लिए हंस और मदन के लिए कौआ का प्रतीकात्मक प्रयोग हुआ है।

प्रश्न संख्या – 06

सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच क्या बातचीत हुई और पत्रकार मित्र ने उन्हें किस तरह उत्तर दिया?

उत्तर – सेन साहब के और उनके मित्रों के बीच खोखा की शिक्षा-दीक्षा पर बातचीत हुई। पत्रकार मित्र ने उन्हें व्यंग्यात्मक शैली में शिष्टतापूर्वक उत्तर दिया।

प्रश्न संख्या – 07

मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहता है?

उत्तर – मदन और ड्राइवर के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार बताना चाहता है कि ये पीढ़ियां अन्याय, अत्याचार, अपमान आदि को सहन करने की बजाय प्रतिकार करने में विश्वास करती हैं।
अतः अब शोषक वर्ग को सावधान हो जाना चाहिए।

प्रश्न संख्या – 08

काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है?

उत्तर – सेन साहब के ड्राइवर के द्वारा गाड़ी छूने मात्र के अपराध में मदन के साथ जो मारपीट की गई थी, काशू और मदन के बीच झगड़े का कारण उसी मारपीट की खीझ था।
इस प्रसंग के द्वारा लेखक दिखाना चाहता है कि बाल मन में उपजे प्रतिशोध की भावना भी बड़ी प्रबल होती है।

प्रश्न संख्या – 09

महल और झोपड़ी वालों की लड़ाई में अक्सर महल वाले ही जीतते हैं, पर उसी हालत में जब दूसरे झोपड़ वाले उनकी मदद अपने ही खिलाफ करते हैं।’ लेखक के इस कथन को कहानी से एक उदाहरण देकर पुष्ट कीजिए।

उत्तर – लेखक के उक्त कथन की पुष्टि सेन साहब के बंगले के बगल वाली गली में काशू और मदन के बीच की लड़ाई से होती है। जहां महल वाले काशू झोपड़ी वाले मदन के सामने मिनट भर भी नहीं टिक सका और वहां से दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ।
वहां काशू को किसी की सहायता नहीं मिली सो उसने जान बचाकर भागने में ही अपनी भलाई समझी।

प्रश्न संख्या – 10

रोज – रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने की बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है?

उत्तर – रोज – रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशू की पिटाई करने पर उसे दंडित करने की बजाय अपनी छाती से लगा लेता है क्योंकि मदन ने अपने साथ हुए जोर-जबरदस्ती को सहन करने की बजाय प्रतिकार करने का साहस दिखाया था।

आपकी दृष्टि में कहानी का नायक कौन है? तर्कपूर्ण उत्तर दें।

प्रश्न संख्या – 11

 उत्तर – मेरी दृष्टि में ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी का नायक ‘मदन’ है। क्योंकि साहित्यिक मानदंड के अनुसार किसी कहानी का नायक वही पात्र हो सकता है जो सर्वाधिक संघर्षशील, प्रभावकारी और महत्वपूर्ण हों तथा जोर – जूल्म आदि का वीरता पूर्वक दमन करे।
उपरोक्त मानदंड के आधार पर भी कहानी का नायक निर्विवाद रूप से ‘मदन’ ही ठहरता है।

प्रश्न संख्या – 11

सेन साहब, मदन , काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण करें।

‘विष के दांत’ पाठ के सेन साहब का चरित्र – चित्रण करें।

– सेन साहब ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी का एक खल पात्र है। वे मध्यमवर्गीय होकर भी खुद को किसी सामंत से कम नहीं समझते। उसने घर में बच्चों के लिए कुछ नियम तय किए थे जिसका पालन लड़कियों से तो करवाई जाती थी परन्तु इकलौता पुत्र काशू को कभी बाध्य नहीं करते थे। वे अपने बिगड़ैल लड़का में इंजीनियर बनने के लक्षण देखते थे परन्तु अपने अधिकार पर अडिग मदन में गुंडे, चोर और डाकू के लक्षण देखते थे।
कुल मिलाकर सेन साहब एक दंभी, शोषक, लैंगिक विषमता आदि अवगुणों से युक्त व्यक्ति के रूप में चित्रित है।

‘विष के दांत’ शीर्षक पाठ के मदन का चरित्र-चित्रण कीजिए।

– ‘विष के दांत’ शीर्षक पाठ में ‘मदन’ नायक के रूप में चित्रित है। मदन सेन साहब की फेक्ट्री में एक साधारण किरानी के पद पर कार्यरत गिरधरलाल का पुत्र है। वह भले एक साधारण किरानी का बेटा है लेकिन आत्मस्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करता है।
एकबार सेन साहब की गाड़ी को छूने मात्र के अपराध में उसके ड्राइवर ने इसे धक्का दे दिया। धक्का खाने के बाद इसने बड़ी निडरता पूर्वक  ड्राइवर का सामना किया। सेन साहब को ये उसी दिन से चुभने लगे थे। एक दिन सेन साहब के इकलौते पुत्र काशू ने जब इसके साथ बदसलूकी की तो इन्होंने प्रतिक्रिया स्वरूप उसके दो दांत तोड़ दिया।
इस प्रकार ‘मदन’ कहानी के अन्य पात्रों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण पात्र यानि नायक के रूप में प्रतिष्ठित है।

‘विष के दांत’ शीर्षक पाठ के काशू का चरित्र चित्रण करें।

– नलिन विलोचन शर्मा द्वारा रचित ‘विष के दांत’शीर्षक पाठ में काशू बिगड़ैल स्वभाव का पात्र है। काशू सेन दंपती का इकलौता पुत्र है। वह घरेलू अनुशासन के साथ – साथ जीवन के नियम का भी अपवाद है।
काशू का जन्म सेन दंपती के उस अवस्था में हुआ था जब वे दोनों पुत्र प्राप्ति के मोह से मुक्त हो चुके थे। ऐसी स्थिति में प्रायः इकलौते पुत्र को अधिकाधिक लाड़-दुलार मिलता है। सो काशू को भी सेन दंपती से उच्च स्तर का प्यार प्राप्त हुआ। काशू माता – पिता के अधिक लाड़-प्यार के कारण बिगड़ैल स्वभाव का हो गया था। घर में नौकर-चाकर और बहनों पर हाथ छोड़ना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी।
एक दिन वे महल के बगल वाली गली में वहां पहुंच गए जहां मदन अपने आवारागर्द दोस्तों के साथ लट्टू नचा रहा था। मदन को लट्टू नचाते देख काशू का मन भी मचल गया परन्तु आदत से लाचार मदन पर रौब जमाने लगा, मदन तो पहले से ही बदले की आग में जल रहा था। सो उसने काशू के दो – दो दांत तोड़ दिया। मदन से मार खाकर किसी तरह भागकर घर पहुंचा।

‘विष के दांत’ शीर्षक पाठ के गिरधरलाल का चरित्र-चित्रण करें।

– ‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी में गिरधरलाल अन्याय-अत्याचार को सहन करने वाले पात्र के रूप में चित्रित है। वह सेन साहब की फेक्ट्री में साधारण किरानी के पद पर कार्यरत हैं।
गिरधरलाल कहानी के नायक मदन का पिता है। उसे सेन साहब से मामूली तनख्वाह मिलता है। जिस कारण वे मदन को अच्छे स्कूल में नहीं दाखिला नहीं दिलवा सके। परन्तु किसी की शिकायत पर मदन को कठोर दण्ड दिया करते थे। वे अपने ऊपर होने वाले अन्याय, अत्याचार आदि का प्रतिकार नहीं कर पाते थे। एक दिन जब मदन ने काशू के दो दांत तोड़ दिए तो सेन साहब ने उसे नौकरी से निकाल दिया। सेन साहब द्वारा नौकरी से निकाले जाने के बाद भी एक पिता के रूप में वे बहुत खुश थे क्योंकि मदन ने वीरता पूर्वक शोषक वर्ग के जहरीले दांत को तोड़ दिया था।

‘विष के दांत’ पाठ का लेखक परिचय दें।

विष के दांत’ शीर्षक पाठ साहित्य की कौन सी विधा है?

– कहानी

‘विष के दांत’ शीर्षक कहानी के लेखक कौन है? ‘विष के दांत’ नामक कहानी के लेखक कौन है? ‘विष के दांत’ पाठ के कहानीकार कौन है? ‘विष के दांत’ कहानी के रचनाकार कौन है?

– नलिन विलोचन शर्मा

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म कब हुआ था?

– 18 फरवरी 1916 ई.

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म कहां हुआ था?

– नलिन विलोचन शर्मा का जन्म पटना के बदरघाट में हुआ था।

नलिन विलोचन शर्मा का जन्म कब और कहां हुआ था?

– नलिन विलोचन शर्मा का जन्म पटना के बदरघाट में हुआ था।

नलिन विलोचन शर्मा के पिता का क्या नाम था? नलिन विलोचन शर्मा के पिता कौन है? नलिन विलोचन शर्मा किसके पुत्र है?

– पंडित रामावतार शर्मा

नलिन विलोचन शर्मा के माता का क्या नाम है? नलिन विलोचन शर्मा की मां का क्या नाम है?

– रत्नावती शर्मा

नलिन विलोचन शर्मा की मृत्यु कब हुई? नलिन विलोचन शर्मा का निधन कब हुआ? नलिन विलोचन शर्मा कब मरा?

– 12 सितंबर 1961 ई.

हिन्दी कविता में प्रपद्यवाद के प्रवर्तक कौन है? हिंदी कविता में प्रपद्यवाद का प्रवर्तन किसने किया?

– नलिन विलोचन शर्मा

नलिन विलोचन शर्मा की प्रमुख रचनाएं कौन-कौन सी है?

– नलिन विलोचन शर्मा की प्रमुख रचनाएं दृष्टिकोण, साहित्य का इतिहास दर्शन, मानदंड, हिन्दी उपन्यास – विशेषतः प्रेमचंद, साहित्य तत्व और आलोचना, विष के दांत तथा अन्य कहानियां इत्यादि हैं।

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