भारत से हम क्या सीखें

‘भारत से हम क्या सीखें’ शीर्षक पाठ का प्रश्नोत्तर लिखें।

प्रश्न संख्या – 01

समस्त भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है। – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर – समस्त भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है। लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि भारतवर्ष प्रकृति प्रदत्त सभी प्रकार के सौंदर्य संपदाओं जैसे – जल, वायु, मृदा, वर्षा, वन, बहार, नदी, पर्वत, पहाड़, पशु-पक्षियों, विविधतापूर्ण ऋतुओं, सांस्कृतिक धरोहरों आदि से भरा – पूरा विश्व का एकमात्र देश है।

प्रश्न संख्या – 02

लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहां हो सकते हैं और क्यों?

उत्तर – लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन गांवों में ही हो सकते हैं क्योंकि भारतीय सभ्यता – संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, रीति-रिवाज, जीवन – दर्शन आदि का पालन अब केवल ग्रामीण परिवेश में ही होता है।

प्रश्न संख्या – 03

भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों?

उत्तर – भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता उन यूरोपियन लोगों के लिए वांछनीय है जो वर्तमान समस्याओं के समाधान के प्रति जिज्ञासु हैं। क्योंकि भारत में आज भी बड़ी मात्रा में समस्या आधारित संभावनाएं मौजूद है। जहां उनके लिए अपना कौशल दिखाने का अनगिनत अवसर उपलब्ध है।

प्रश्न संख्या – 04

लेखक ने किन विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है?

उत्तर – लेखक ने ज्ञान – विज्ञान, भू-विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, नृवंश विज्ञान, भाषा विज्ञान, राजनीति विज्ञान, सामाज शास्त्र, विधि शास्त्र, धर्म शास्त्र , नीति शास्त्र आदि विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक माना है।

प्रश्न संख्या – 05

लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों

उत्तर – ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक ने वारेन हेस्टिंग्स द्वारा उपहार स्वरूप प्रेषित 172 प्राचीन दारिस स्वर्ण मुद्राओं को गला दिया था जबकि उन स्वर्ण मुद्राओं का व्यापक ऐतिहासिक ऐतिहासिक महत्व था। लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित इसी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है। क्योंकि वे नहीं चाहते हैं कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं का दुहराव हो।

प्रश्न संख्या – 06

लेखक ने नीति कथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है?

उत्तर – लेखक के अनुसार नीति कथाओं के अध्ययन के क्षेत्र में भारत के कारण ही नवजीवन का संचार हो पाया है, क्योंकि यूरोप में सदियों से प्रचलित कई कहावतों और दंतकथाओं की जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं। अपने कथन के पक्ष में लेखक ने कई ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत किए।

इस तरह लेखक ने नीति कथाओं के क्षेत्र में भारतीय अवदान को रेखांकित किया है।

प्रश्न संख्या – 07

भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाए हैं?

उत्तर – भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण के रूप में लेखक ने बाइबल और शाहनामा के उद्धरण को दिखाएं हैं। लेखक के अनुसार बाइबल में वर्णित हाथी – दांत, बन्दर, मोर, चंदन आदि जिन वस्तुओं की ओफिर से निर्यात की बात कही गई है वे तत्कालीन भारत के अतिरिक्त किसी अन्य देश में मौजूद ही नहीं था। शाहनामा के रचनाकाल में भी भारत के साथ यूरोप का व्यापारिक संबंध बरकरार था।

प्रश्न संख्या – 08

भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्वपूर्ण बतलाया है? स्पष्ट करें।

उत्तर- भारत की ग्राम पंचायतों को लेखक ने अत्यंत सरल राजनैतिक इकाईयों के रूप में प्राचीन स्थानीय प्रशासनिक प्रणाली के अर्थ में महत्वपूर्ण बतलाया है। लेखक ने विधिशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए इसे महत्वपूर्ण बतलाया है क्योंकि यह यूनान, रोम या जर्मनी के विधिशास्त्र से सर्वथा भिन्न होते हुए भी साम्य है।

प्रश्न संख्या – 09

धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है?

उत्तर – भारत आदिकाल से ही धर्म प्रधान देश रहा है। यह भारतवर्ष हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि धर्मों की जन्मस्थली और पारसियों के जरथ्रुस्र धर्म की शरणस्थली है। इस पावन भूमि ने सभी धर्मों, सम्प्रदायों, मतों आदि को फलने-फूलने का समान अवसर प्रदान किया है।

इस प्रकार धर्मों की दृष्टि से भारत का व्यापक महत्त्व है।

प्रश्न संख्या – 10

भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है? स्पष्ट करें।

उत्तर – भारत के लोग अपनी प्राचीन सभ्यता- संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्पराओं, भाषाओं आदि से आज भी उसी तरह जुड़े हुए हैं, जिस तरह प्राचीन काल में जुड़े हुए थे। इसके स्वरूप में समय आधारित अवदानों के कारण अवश्य बदलाव आया है और भविष्य में भी आएगा परन्तु उसका मौलिक स्वरूप आज भी यथावत है।

इस तरह भारत अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है।

(स्पष्टीकरण:- समय आधारित अवदानों का तात्पर्य – पहले शादी-विवाह में वर हाथी ,घोड़ा आदि से जाते थे लेकिन अब कार, स्कार्पियो आदि से जाते हैं। दीपावली में पहले दीपकों से घर को सजाया जाता था लेकिन अब बल्बों आदि से सजाया जाता हैं।)

प्रश्न संख्या – 11

मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएं और महत्व बतलाए थे?

उत्तर – मैक्समूलर ने प्राचीनता और विश्व-व्यापकता को संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता बतलायी हैं। उसके अनुसार लैटिन, ग्रीक, ट्यूटानिक, स्लाव आदि भाषाओं के बीच पारस्परिक समानता और विषमता के कारण उत्पन्न अहेतुकवाद का सामाधान संस्कृत के कारण ही संभव हो पाया। यह संस्कृत के महत्व को रेखांकित करता है।

प्रश्न संख्या – 12

लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?

उत्तर – लेखक वास्तविक इतिहास संस्कृत, ग्रीक, लैटिन तथा अन्य आर्य भाषाओं से संबंधित ग्रंथों को मानते हैं। क्योंकि इसने मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास को वास्तविकता रूप में प्रकट कर दिखाया है। यह राज्यों के दुराचारों और विभिन्न जातियों के पारस्परिक संघर्षों की अपेक्षा अधिक समतामूलक है।

*स्पष्टीकरण – राज्य आधारित अधिकांश इतिहास – लेखन राजा या शासक वर्ग से लाभ लेकर इतिहासकार के द्वारा उनके हित में बढ़ा-चढ़ाकर लिखा गया है। इसलिए लेखक इसे वास्तविक इतिहास नहीं मानते हैं। यह समाज में ऊंच-नीच को बढ़ावा देता है।

प्रश्न संख्या – 13

संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत को प्रमुख लाभ क्या – क्या हुए ?

उत्तर – संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत को अनेकानेक लाभ हुए। वहां भाषा संबंधित अहेतुकवाद का अंत हो गया। सामाजिक स्तर पर न केवल उदार विचारों का आगमन हुआ बल्कि पहली बार वे वास्तविक इतिहास से भी परिचित हुए।

*स्पष्टीकरण:- अहेतुकवाद की परिभाषा ऊपर अंकित है। सामाजिक स्तर पर उदार विचारों के आगमन का तात्पर्य यह है कि पहले पाश्चात्य देशों में ऊंच-नीच, सभ्य – असभ्य (बर्बर) आदि आधारित भेद-भाव था लेकिन संस्कृत के वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा ने सबको साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित किया। यहां वास्तविक इतिहास का अर्थ स्वयं के बारे में जानकारी देने वाले इतिहास से है। जैसे हम कौन है? हमारी जीवन यात्रा कहां से शुरू हुई आदि आदि।

प्रश्न संख्या – 14

लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को किसकी तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है और क्यों?

उत्तर – लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को सर विलियम जोन्स की तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया है क्योंकि ऐसे स्वप्नदर्शियों से ही अपनी सपनों अथवा कल्पनाओं को वास्तविकता के पटल पर उतारने की प्रेरणा मिलती है। (नवागंतुक=नव+आगंतुक)

प्रश्न संख्या – 15

लेखक ने नया सिकंदर किसे कहा है? ऐसा कहना क्या उचित है? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – लेखक ने नये क्षेत्रों में अनुसंधान, अन्वेषण अथवा अध्ययन के जिज्ञासु नवागंतुकों को नया सिकंदर कहा है। अनुसंधान अथवा अध्ययन के क्षेत्र में ऐसा कहना उचित जान पड़ता है।

लेखक का अभिप्राय यह है कि भारत में आज भी अनुसंधान के अनगिनत अवसर मौजूद है। अतः नवागंतुकों को यह सोचकर हतोत्साहित नहीं होना चाहिए कि अब हमारे लिए वहां कुछ नया करने का अवसर नहीं है।

 

‘भारत से हम क्या सीखें ‘ शीर्षक पाठ साहित्य की कौन सी विधा है?

– भाषण

‘भारत से हम क्या सीखें ‘ पाठ के रचनाकार कौन है? ‘भारत से हम क्या सीखें ‘ पाठ किसकी रचना है?

– फ्रेड्रिक मैक्समूलर

फ्रेड्रिक मैक्समूलर का जन्म कब हुआ था?

– फ्रेड्रिक मैक्समूलर का जन्म 6 दिसंबर 1823 ई० को हुआ था।

फ्रेड्रिक मैक्समूलर का जन्म कहां हुआ था? फ्रेडरिक मैक्समूलर का जन्म किस देश में हुआ था?

– फ्रेडरिक मैक्समूलर का जन्म जर्मनी के डेसाउ नामक नगर में हुआ था।

फ्रेड्रिक मैक्समूलर के पिता का क्या नाम था? फ्रेडरिक मैक्समूलर के पिता कौन थे?

– विल्हेल्म मूलर

फ्रेडरिक मैक्समूलर अपने पिता की मृत्यु के समय कितने वर्ष के थे? फ्रेडरिक मैक्समूलर कितने वर्ष के थे जब उनके पिता का निधन हो गया था?

– 4 वर्ष

मैक्समूलर कितने वर्ष की उम्र में लिपजिंग विश्वविद्यालय में संस्कृत का अध्ययन आरम्भ कर दिया था?

– 18 वर्ष

मैक्समूलर हितोपदेश का किस भाषा में अनुवाद किया? फ्रेडरिक मैक्समूलर ने ‘हितोपदेश’ का किस भाषा में अनुवाद प्रकाशित करवाया?

– जर्मन भाषा में

फ्रेडरिक मैक्समूलर ने किन-किन उपनिषदों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया?

– कठ् तथा केन उपनिषदों का।

मैक्समूलर ने किस संस्कृत ग्रंथ का जर्मन में पद्यानुवाद किया?

– मेघदूत का

मैक्समूलर को किसने ‘वेदांतियों का वेदांती’ कहा?

– स्वामी विवेकानंद जी ने

स्वामी विवेकानंद जी ने किसे ‘वेदांतियों का वेदांती’ कहा?

– फ्रेडरिक मैक्समूलर को

वेदांतियों का वेदांती’ किसे कहा गया है?

– फ्रेडरिक मैक्समूलर को

साम्राज्ञी विक्टोरिया द्वारा मैक्समूलर को अपने ऑस्बॉर्न प्रासाद या ऑस्बॉर्न महल में ऋग्वेद और संस्कृत के साथ यूरोपियन भाषाओं की तुलना आदि विषयों पर व्याख्यान देने के लिए किया था?

– 1868 ई. में

फ्रेडरिक मैक्समूलर को ‘ऋग्वेद तथा संस्कृत के साथ यूरोपियन भाषाओं की तुलना आदि विषयों’ पर व्याख्यान देने के लिए किसने आमंत्रित किया था?

– महारानी विक्टोरिया ने

महारानी विक्टोरिया ने ‘ऋग्वेद तथा संस्कृत के साथ यूरोपियन भाषाओं की तुलना आदि विषयों’ पर मैक्समूलर के व्याख्यान से प्रभावित होकर कौन सी उपाधि प्रदान की?

– नाइट की उपाधि

‘ऋग्वेद तथा संस्कृत के साथ यूरोपियन भाषाओं की तुलना आदि विषयों’ पर  व्याख्यान से प्रभावित होकर किसने मैक्समूलर को ‘नाइट’ की उपाधि प्रदान कर दी?

– महारानी विक्टोरिया ने
क्या मैक्समूलर ने महारानी विक्टोरिया द्वारा दी गई ‘नाइट’ उपाधि को स्वीकार किया?
– नहीं

प्रस्तुत भाषण ‘भारत से हम क्या सीखें ‘ का हिंदी में अनुवाद या भाषांतरण किसने किया?

– डॉ. भवानीशंकर त्रिवेदी ने

फ्रेडरिक मैक्समूलर की मृत्यु कब हुई? फ्रेडरिक मैक्समूलर का निधन या देहांत कब हुआ?

– 28 अक्टूबर 1900 ई. में

‘भारत से हम क्या सीखें’ पाठ का शब्दार्थ :-

सर्वविध – सभी प्रकार के/सब तरह के
सम्पदा – संपत्ति, ऐश्वर्य, दौलत
सौन्दर्य – सुन्दरता
परिपूर्ण – भरा-पूरा
अवलोकन – अध्ययन / निरीक्षण
भूतल – धरती , धरातल, पृथ्वी की ऊपरी सतह
छटा – शोभा , सौन्दर्य, छवि, कांति
निखरना – रूप आदि का खिलना
उत्कृष्टतम – श्रेष्ठतम, सर्वश्रेष्ठतम
साक्षात्कार – प्रत्यक्ष दर्शन
सामाधान – हल , उपाय, निराकरण
मनन – चिंतन
सदा – हमेशा
अवगाहन – मंथन , डुबकी लगाना
अंतरतम – हृदय स्थल, सबसे आंतरिक भाग
सर्वांगीण – व्यापक
शाश्वत – चिरस्थाई, अंतहीन
वांछनीय – कामना योग्य
अभिरुचि – दृढ़ इच्छा , शौक
पैठ – पहुंच, गम्य शक्ति (पहुंचने योग्य शक्ति)
निर्वासन – अन्यत्र वास, दूसरे स्थान पर निवास
अनायास – स्वत: , आसानी से
आकृष्ट – आकर्षित करना, अपनी ओर खींच लेना
कान्तर / कांतर – घना वन , जंगल
छानबीन – जांच – पड़ताल, निरीक्षण
सुनहले – स्वर्णिम
साकारता का अर्थ क्या होता है? साकारता का अर्थ बताइए।
– साकार करता हुआ, सार्थक करता
संग्रहालय – संग्रह भवन, जहां स्मरणीय वस्तुओं का संग्रह किया जाता है।
पुरातत्व – प्राचीन वस्तुओं, उत्खनन आदि से प्राप्त प्राचीन वस्तुएं
रिपोर्ट – विवरण
ध्वंसावशेष – विनाशावशेष, विनाश के बाद का बचा हुआ टुकड़ा
फावड़ा – कुदाल
आतुर – बेचैन, उतावला
प्रचुर – पर्याप्त
परिमाण – मात्रा
दारिस – मुद्रा का एक प्राचीन प्रकार
निदेशक मंडल – प्रशासनिक निकाय के अधिकारियों का समूह
प्रेषित – भेजे गए
दुर्लभ – कठिनाई पूर्वक प्राप्त होने वाला
महान – उच्च कोटि का
उदार – विशाल हृदय वाला, ईमानदार
प्रमाणित – सिद्ध
नियति – दुर्भाग्य, बदकिस्मती
अन्यत्र – दूसरे जगह
आधारशिला – नींव
संचार – विस्तार, फैलाव
नानाविध – अनेक प्रकार के
सर्वांश – सम्पूर्णत:

प्रत्नयुग का अर्थ क्या होता है? प्रत्नयुग का अर्थ बताइए।

– प्राचीन युग
दंतकथा – मौखिक कथा जिसका लिखित प्रमाण नहीं होता है।
अनुरुपता – समानता, एकरुपता
असंदिग्ध – निश्चित, निसंदेह
आवागमन – आना – जाना
सुलभ – सरल, आसान
निष्कर्ष – अंतिम निर्णय
निर्यात – वस्तुओं को अन्य जगहों पर भेजना
ठप्प – बाधित
क्षय – नाश,क्षर
भिन्न – अलग
परवर्ती – बाद वाला, बाद के समय का
आधारभूत – मौलिक, आधारिक
अनुसंधान – अन्वेषण
वैशिष्ट्य – श्रेष्ठता
परख – पहचान
क्षमता – सामर्थ्य
सुयोग – सुअवसर
विद्यमान – मौजूद
उद्भव – उत्पत्ति, जन्म,उदय
अपरिहार्य – अनिवार्य , अत्याज्य, नहीं छोड़ने योग्य
क्षीयमाण – नाशवान, नाश होता हुआ
नित्य – निरंतर, हमेशा, हर दिन
सर्वत्र – सभी जगह
सुदूर – दुरस्थ, बहुत दूर स्थित
सुलभ – आसानी से उपलब्ध
ज्वलंत – प्रत्यक्ष , अत्यंत स्पष्ट
लोकप्रिय – लोक में प्रिय, लोगों के बीच प्रसिद्ध
प्रतिनिधित्व – प्रतिनिधि का कार्य
मसला – समस्या, उलझन, मुद्दा
अज्ञात – अंजान
गहनतम –  सर्वाधिक गहराई, अत्यधिक घनापन
सहानुभूति – अनुकंपा, कृपादृष्टि, हमदर्दी
सदाशयता – सज्जनता, उदारता
शिल्प – हस्तकला
विचरण – परिभ्रमण
उपादेय – उपयोगी, ग्रहण करने योग्य
संचित – जमा, संचय किया हुआ
सम्यक – उपयुक्त, पुरी तरह से
व्याख्या – विवेचना
चर्चा – वाद-विवाद, जिक्र
सर्वातिशायी – सर्वशक्तिमान, जिसमें सारी चीजें समाहित हो जाए
साम्य – समानता
व्यक्त – प्रकट
कुंजी – सरल साधन, चाभी
सदी – शताब्दी, सौ साल
रहस्य – गुप्त, अप्रकट,राज
सर्वथा – बिल्कुल , बिलकुल
तत्काल – तुरंत, उसी समय
पारस्परिक – आपसी
अग्रजा – बड़ी बहन
ज्ञात – अवगत, विदित, जानकारी में
निर्भ्रांत – निसंदेह , भ्रमरहित, स्पष्ट
निष्कर्ष – नतीजा, निचोड़, निर्णय की स्थिति
अविभक्त – अविभाजित, विभाजन रहित
कालान्तर – समय के अंतराल, बाद के समय
गढ़ना – बनाना , परिश्रम पूर्वक तैयार करना
सरल – आसान
लुप्त – नष्ट
कल्पना – अनुमान
शाखाओं – डालियों
अपितु – बल्कि
घपला – धांधली, गड़बड़ी, फेरबदल
पच्चीकारी – पत्थरों या धातुओं पर नगीने आदि जड़ने की कलाकारी या चित्रकला
कमोबेश – लगभग, थोड़ा-बहुत
अवशेष – शेष भाग
आधार – नींव, सहारा
ढांचा – आकृति, बनावट
दीर्घकालीन – लंबे समय का
अन्दाजा – अनुमान
उद्गम – स्रोत – उत्पन्न करने वाला साधन या निधि

स्रोत का क्या अर्थ होता है? स्रोत का अर्थ बताइए।

– स्रोत का अर्थ ‘उत्पन्न करने वाली इकाई या निधि’ होता है।
  • पृथक – अलग , दूर
  • आदि – आरंभ, शुरुआत
  • परम्परा – चलन, अटूट प्रथा
  • प्रवाह – बहाव
  • दुराचार – अनुचित आचरण
  • क्रूरता – निर्दयता, बर्बरता
  • अपेक्षा – तुलना में
  • ज्ञातव्य – जानने योग्य, बोधगम्य
  • पठनीय – पढ़ने योग्य
  • सारभूत – श्रेष्ठतम, सर्वश्रेष्ठतम
  • पाठ – पठन-पाठन, सबक

पाठ का अर्थ क्या होता है? पाठ का अर्थ बताइए।

– पाठ का अर्थ सबक या सस्वर पाठन होता है।
सिवा – छोड़कर

सिवा का अर्थ क्या होता है? सिवा का अर्थ बताइए।

– सिवा का अर्थ ‘छोड़कर’ या ‘बिना’ होता है।
सान्ध्य – संध्याकालीन

सान्ध्य का अर्थ क्या होता है? सान्ध्य का अर्थ बताइए।

– सान्ध्य का अर्थ ‘संध्याकालीन’ होता है।
श्यामपट्ट – ब्लैक बोर्ड
तथ्य – साक्ष्य, सबूत
व्यापक – विस्तृत
फलस्वरूप – परिणामस्वरूप
धारणाएं – पूर्व से सुनिश्चित विचार, संकल्पना
अभिभूत – भावविभोर
चेतना – मनोवृत्ति
अध्याय – पाठ , सर्ग
स्मृतियां – यादें
साकार – आकार युक्त
अजनबी – अपरिचित, अनजान
बर्बर – अमानवीय, असभ्य, जंगली
कदापि – कभी भी
उक्ति – कथन , कहावत
क्रियान्वित – कार्य प्रयुक्त, काम में लगा हुआ
लाभ – फायदा, उपहार
प्राच्यविद्या – पूर्वी देशों की विद्या, भारत से संबंधित प्राचीन विद्या
विशारद – किसी विषय का विशेषज्ञ
तट – समुद्र के किनारे
बजाय – बदले में
क्षितिज – आकाश, आसमान
ललक – उत्कंठा, तीव्र जिज्ञासा, लालसा
सुविस्तीर्ण – सुन्दरता पूर्वक बिखरे हुए

सुविस्तीर्ण का अर्थ क्या होता है? सुविस्तीर्ण का अर्थ बताइए।

– सुविस्तीर्ण का अर्थ ‘सुन्दरता पूर्वक बिखरा हुआ’ होता है।
अनिर्वचनीय – वर्णन करने योग्य नहीं, वाणी से परे
प्रतिभा – विलक्षण बौद्धिक शक्ति
उर्वर – उपजाऊ
विविधता – विभिन्नता
अपरान्त – पश्चिमी (सीमा में)
आशा – उम्मीद
मन्द – धीमी, धीमा
समीर – ठंडी हवा
परिणत – बदलने

‘भारत से हम क्या सीखें ‘ पाठ से संबंधित संधि – विच्छेद:-

मानव का संधि विच्छेद करें।

– मनु + अ = मानव

उत्कृष्टतम का संधि – विच्छेद करें।

– उत्कृष्+तम = उत्कृष्टतम

स्वर्ग का संधि – विच्छेद करें।

– स्व: + ग = स्वर्ग

साक्षात्कार का संधि – विच्छेद करें।

– साक्षात् + कार = साक्षात्कार

अध्ययन का संधि – विच्छेद करें।

– अधि + अयन = अध्ययन

सर्वांगीण का संधि – विच्छेद करें।

– सर्व + अंगीन = सर्वांगीण

पोषण का संधि – विच्छेद करें।

– पोष् + अन = पोषण

निर्वासन का संधि – विच्छेद करें।

– नि: + वासन = निर्वासन

आकृष्ट का संधि – विच्छेद करें।

– आकृष् + त = आकृष्ट

साकार का संधि – विच्छेद करें।

– स + आकार = साकार

संग्रहालय का संधि – विच्छेद करें।

– संग्रह + आलय = संग्रहालय

सर्वेक्षण का संधि विच्छेद करें।

– सर्व + ईक्षण = सर्वेक्षण

ध्वंसावशेष का संधि विच्छेद करें।

– ध्वंस + अवशेष = ध्वंसावशेष

सर्वोत्तम का संधि विच्छेद करें।

– सर्व + उत्तम = सर्वोत्तम

दुर्लभ का संधि विच्छेद करें।

– दु: + लभ = दुर्लभ

महत्व का संधि विच्छेद करें।

– महत् + त्व = महत्व

निर्भर का संधि विच्छेद करें।

– नि: + भर = निर्भर

दुर्भाग्य का संधि विच्छेद करें।

– दु: + भाग्य = दुर्भाग्य

भविष्य का संधि विच्छेद करें।

– भव + इष्य = भविष्य

व्यापक का संधि विच्छेद करें।

– वि + आपक = व्यापक

सम्पूर्ण का संधि विच्छेद करें।

– सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण

संस्कृत का संधि विच्छेद करें।

– सम् + कृत = संस्कृत

अत्यंत का संधि विच्छेद करें।

– अति + अंत = अत्यंत

उपादेय का संधि विच्छेद करें।

– उप + अदेय = उपादेय

विद्यार्थी का संधि विच्छेद करें।

– विद्या + अर्थी = विद्यार्थी

निर्माण का संधि विच्छेद करें।

– नि: + मान = निर्माण

संबंध का संधि विच्छेद करें।

– सम् + बंध = संबंध

अत्यधिक का संधि विच्छेद करें।

– अति + अधिक = अत्यधिक

निर्भ्रान्त का संधि विच्छेद करें।

– नि: + भ्रान्त = निर्भ्रान्त

निष्कर्ष का संधि विच्छेद करें।

– नि: + कर्ष = निष्कर्ष

प्रत्येक का संधि विच्छेद करें।

– प्रति + एक = प्रत्येक

प्रत्यय का संधि विच्छेद करें।

– प्रति + अय = प्रत्यय

निश्चित का संधि विच्छेद करें।

– नि: + चित = निश्चित

विस्तीर्ण का संधि विच्छेद करें।

– वि: + तीर्ण

प्रत्यक्ष का संधि विच्छेद करें।

– प्रति + अक्ष = प्रत्यक्ष

भारत से हम क्या सीखें ‘ पाठ के कुछ पारिभाषिक शब्द एवं उनकी परिभाषाएं :-

भूमंडल किसे कहते हैं?

– पृथ्वी का स्थलीय भाग जहां लोग निवास करते हैं, उसे भूमंडल कहते हैं। यह महादेशों या महाद्वीपों में विभाजित है।

दार्शनिक किसे कहते हैं?

– वैसे व्यक्ति जो दर्शनशास्त्र का विधिवत अध्ययन कर मनुष्यों के मनोभाव को स्थिर या निर्णय शक्ति को बढ़ाने के लिए विचार प्रकट करते हैं, उसे दार्शनिक कहते हैं। जैसे:- काण्ट , प्लेटो, सुकुरात , शंकराचार्य, कपिल मुनि, पाणिनि आदि

भू-विज्ञान किसे कहते हैं?

– पृथ्वी और उसके संरचना आदि से संबंधित विज्ञान को भू-विज्ञान कहते हैं।

वनस्पति विज्ञान किसे कहते हैं?

– जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत पेड़-पौधों की गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है, उसे वनस्पति विज्ञान कहते हैं। थियोफ्रेसस्टस को वनस्पति विज्ञान का जनक माना जाता है।

हकर्स कौन थे?

– हकर्स एक वनस्पति वैज्ञानिक थे।

हेकल या एर्न्स्ट हेकल कौन थे?

– हेकल एक जर्मन प्राणी वैज्ञानिक थे।

नृवंश विद्या किसे कहते हैं?

– वैसी विद्या जो किसी संस्कृति या सामाजिक समूह के बारे में विशिष्ट जानकारियां प्रदान करती हैं, उसे नृवंश विद्या कहते हैं।

जनरल कनिंघम कौन थे?

– जनरल कनिंघम या अलेक्जेंडर कनिंघम ब्रिटिश सेना में इंजीनियर थे। जनरल कनिंघम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का जनक माना जाता है।

वारेन हेस्टिंग्स कौन थे?

– वारेन हेस्टिंग्स भारत के गवर्नर जनरल थे। वाराणसी में उसे 172 दारिस सोने से भरा घड़ा मिला था।

दैवत विज्ञान किसे कहते हैं?

– देवी – देवताओं और उनकी मान्यताओं से संबंधित विज्ञान को दैवत विज्ञान कहते हैं। इसमें अध्यात्म, चमत्कार, देवलीला आदि का वर्णन रहता है।

एफ्रोडाइट कौन थी?

– एफ्रोडाइट प्रेम, अलंकरण, वासना, संतान उत्पत्ति आदि की प्राचीन चमत्कारी देवी थी।

स्ट्रटिस कौन थे?

– स्ट्रटिस चौथी सदी के यूनानी कहानीकार थे।

दंतकथा से आप क्या समझते हैं? दंतकथा किसे कहते हैं?

– सामान्य लोकाचार में प्रयुक्त वैसी कहानी जिसका कोई ठोस आधार या प्रमाण मौजूद नहीं है, उसे दंतकथा कहते हैं।

सोलोमन कौन थे?

– यहुदी धर्मग्रंथों के अनुसार सोलोमन यहूदा साम्राज्य का चौथा शासक था। उसका शासनकाल अनुमानतः 970 ईसा पूर्व से 931 ईसा पूर्व के बीच था।

ओफिर क्या है? ओफिर से आप क्या समझते हैं?

– ओफिर फिलिस्तीन के दक्षिण – पूर्व स्थित एक बंदरगाह था। इस बंदरगाह का जिक्र बाइबल में भी किया गया है।

शाहनामा किसकी रचना है? शाहनामा क्या है?

– शाहनामा फारसी भाषा का एक महाग्रंथ है जिसकी रचना फिरदोसी के द्वारा किया गया था। इसमें प्राचीन ईरानी राजाओं का वर्णन है।

भाषाविज्ञान क्या है? भाषाविज्ञान किसे कहते हैं? भाषाविज्ञान से आप क्या समझते हैं?

– जिस शास्त्र के अंतर्गत भाषा की उत्पत्ति, रचना, प्रकृति आदि पक्षों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाता है, उसे भाषाविज्ञान कहते हैं।

विधिशास्त्र क्या है?

– वह शास्त्र जिसमें मनुष्यों के लिए परिस्थितियों के अनुसार व्यक्तिगत अथवा सामाजिक या सामाजिक स्तर पर नीतियां निर्धारित की गई हैं, उसे विधिशास्त्र कहते हैं।

धर्मसूत्र क्या है? धर्मसूत्र किसे कहते हैं? धर्मसूत्र से आप क्या समझते हैं?

– मनुष्यों के लिए सुकर्मों और कुकर्मों के आधार पर कर्तव्य और अकर्तव्य से संबंधित सूत्र को धर्मसूत्र कहते हैं। यह राजा और प्रजा के कर्तव्यों का निर्धारण भी करता है। जैसे:- पुराण, उपनिषद आदि

समयाचारिक सूत्र क्या है? समयाचारिक सूत्र किसे कहते हैं? समयाचारिक सूत्र से आप क्या समझते हैं?

– वैसे सूत्र जिसमें मनुष्यों के विभिन्न कार्यों के लिए उपयुक्त समय और उनके निर्दिष्ट फल का वर्णन होता है, उसे समयाचारिक सूत्र कहते हैं। इसमें समय विरुद्ध कार्यों के दुष्परिणामों का वर्णन भी किया गया है। जैसे:- भृगु संहिता, वात्स्यायन का कामसूत्र, ज्योतिष शास्त्र इत्यादि।

ट्युटानिक भाषा किसे कहते हैं? भाषा क्या है?

– यूरोप महाद्वीप के ट्युटानिक जनजातियों की भाषा को ट्युटानिक भाषा कहते हैं। अंग्रेजी, जर्मन आदि भी ट्युटानिक भाषा का संशोधित रूप है।

अहेतुकवाद क्या है? अहेतुकवाद किसे कहते हैं? अहेतुकवाद से आप क्या समझते हैं?

– वह वाद या सिद्धांत जिसमें किसी कारण या हेतु की पहचान करने पर जोर नहीं दिया जाता है, उसे अहेतुकवाद कहते हैं।

पच्चीकारी क्या है? पच्चीकारी किसे कहते हैं? पच्चीकारी से आप क्या समझते हैं?

– वह ऐतिहासिक कला जिसमें किसी कांच या पत्थर के टुकड़ों को आपस में जोड़कर या चिकना बनाकर उसमें रत्न आदि जड़कर सजावटी चित्रकारी की जाती है, उसे पच्चीकारी कहते हैं।

लैटिन भाषा क्या है? लैटिन भाषा किसे कहते हैं? लैटिन भाषा से आप क्या समझते हैं?

– लैटिन भाषा एक प्राचीन शास्त्रीय भाषा है। वर्तमान में यह वेटिकन सिटी की धर्म भाषा है। प्राचीन काल में यह रोमन साम्राज्य की राजभाषा थी।

एंग्लो सेक्सन भाषा क्या है? एंग्लो सेक्सन भाषा किसे कहते हैं?

– एंग्लो – सेक्सन का नामकरण जर्मनी के ऐन्गल्न और सैक्सनी क्षेत्र से संबंधित है। इन दोनों क्षेत्रों के लोगों ने ब्रिटेन पर 5 वीं सदी से 1066 ई. तक शासन किया था। अपने शासन के दौरान इन लोगों के द्वारा जिस भाषा का प्रयोग किया जाता था उसे ही एंग्लो सेक्सन भाषा कहते हैं। कुल लोग इसे ‘पुरानी अंग्रेजी’ भी कहते हैं।

सर विलियम जोन्स कौन थे?

– सर विलियम जोन्स इंग्लैंड के एक प्रसिद्ध कानूनविद और भाषाशास्त्री थे। अपने भारत प्रवास के दौरान उसने संस्कृत भाषा का भी अध्ययन किया। 1783 ई. में वे कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए गए। 1784 ई. में उसने ‘बंगाल एशियाटिक सोसाइटी ‘ की स्थापना की। न्यायधीश नियुक्त होने के बाद इसे ‘सर’ की उपाधि मिली थी।

सिकन्दर कौन थे?

सिकन्दर मेसिडोनिया और ओलम्पिया के राजा अलेक्जेंडर फिलिप द्वितीय के पुत्र थे। इन्हें अलेक्जेंडर द ग्रेट के नाम से भी जाना जाता है। ये बहुत महात्वाकांक्षी था। ये 328 ईसा पूर्व में भारत पर आक्रमण किया लेकिन भारत के महान सम्राट पोरस ने इसका जबरदस्त मुकाबला किया था। हालांकि सम्राट पोरस की युद्ध में हार हो गई लेकिन सिकन्दर ने इनकी युद्धकला से प्रभावित होकर इन्हें पुनः राजा बना दिया। सिकन्दर ने कम उम्र में ही दुनिया के अधिकांश देशों पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था।

‘शेर की खाल में गधा’ कहावत का अर्थ क्या होता है?

– ‘शेर की खाल में गधा’ कहावत का अर्थ होता है  ‘दयालुता की आड़ में दुष्टता का छिपावा’ होता है।

 

* प्रिय शिक्षार्थियों ! हमने इस पाठ के प्रश्नोत्तर के दौरान यथासंभव प्रश्नों की मांग के अनुसार उत्तर लिखने का प्रयास किया है। आप अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए Google पर vidyapuri.in पर नियमित रूप से विजिट करें। धन्यवाद।

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