मुहावरा किसे कहते हैं? मुहावरा क्या है? मुहावरे से आप क्या समझते हैं?
Muhawara kise kahte hain? Muhawara kya hai? Muhawara se aap kya samjhate hain?
उत्तर – साहित्य अथवा बातचीत में प्रयुक्त ऐसे वाक्यांश जो अपने शाब्दिक अर्थ की अपेक्षा किसी विशेष अर्थ को धारण करते हैं, उसे मुहावरा कहते हैं।
जैसे:- “अंग टूटना” मुहावरा को देखा जाए तो इसका शाब्दिक अर्थ हो सकता है- ‘शरीर के किसी अंग का शरीर से अलग होना।’ परन्तु इसका विशेष अथवा वास्तविक अर्थ ‘थकावट के कारण दर्द होना।’ होता है। आशा करते हैं कि प्रस्तुत उदाहरण से आप मुहावरे की परिभाषा को सही ढंग से समझने में सफल हुए होंगे।
विभिन्न विद्वानों के द्वारा मुहावरे की परिभाषाएं :-
(1) जो वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को न बताकर किसी विशेष अर्थ को बतलाता है और प्रायः क्रिया का काम देता है, उसे मुहावरा या वाग्धारा कहते हैं।
— श्याम चन्द्र कपूर
(2) हिंदी – उर्दू में लक्षण अथवा व्यंजना द्वारा सिद्ध वाक्य को ही ‘मुहावरा’ कहते हैं।
— डॉ० उदय नारायण तिवारी
(3) किसी भाषा में पायी जानेवाली असाधारण शब्द योजना अथवा विलक्षण प्रयोग को मुहावरा कहते हैं।
— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(4) मोटे तौर पर जिस सुगठित शब्द – समूह से लक्षणाजन्य और कभी – कभी व्यंजनाजन्य कुछ विशिष्ट अर्थ निकलता है उसे ‘मुहावरा’ कहते हैं।
— डॉ० ओमप्रकाश गुप्त
(5) मुहावरा भाषा की आत्मा होती है जिनसे भावों तीव्र और सटीक अभिव्यक्ति होती है।
— आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
(6) मुहावरा वह पदबंध है जिसका अर्थ उसके अवयव शब्दों के योग से नहीं निकलता।
— डॉ० हरदेव बाहरी
(7) किसी भाषा में प्रयुक्त विशिष्ट प्रयोग जिनका अभिप्राय से भी विशिष्ट अर्थ लिया जाता है, मुहावरा कहलाता है।
— डॉ० नगेन्द्र।
(8) मुहावरे जनसाधारण की सम्पत्ति है, जो अनुभवों और कौतूहलपूर्ण वस्तुओं से बनते हैं।
— डॉ० सरोजिनी रोहतगी
(9) भाषा के वे निश्चित पद – समूह, जो विशेष अर्थ प्रकट करते हैं, मुहावरे कहलाता है।
— श्यामसुंदर दास
(10) जो पद – समूह भाषा में परम्परागत रूप से विशेष अर्थ में प्रयुक्त हो उसे मुहावरा कहते हैं।
— डॉ० रामकुमार वर्मा।
(11) मुहावरा वह वाक्यांश है जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ का बोध कराता है।
— कामता प्रसाद गुरु
(12) मुहावरा भाषा विशेष में प्रचलित उस शब्दावली को कहते हैं, जिसका अर्थ प्रत्यक्ष अर्थ से भिन्न होता है।
— डॉ० भोलानाथ तिवारी
(13) मुहावरा भाषा की वह शक्ति है जिससे कम शब्दों में अधिक भाव प्रकट होता है।
— डॉ० शिवकुमार मिश्र
(13) मुहावरा वह पद समूह है जो लक्षणा या व्यंजना के द्वारा विशेष अर्थ प्रकट करे मुहावरा कहलाता है।
— डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल।
(14) मुहावरा वह पद समूह है जिसका प्रयोग सामान्य अर्थ से हटकर किसी विशेष अर्थ में होता है।
— आचार्य रामचंद्र शुक्ल
(15) जो पद समूह अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में प्रयुक्त हो वही मुहावरा कहलाता है।
— आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र
बिहार बोर्ड कक्षा दसवीं हिंदी के “श्रम विभाजन और जाति प्रथा” पाठ के प्रश्नोत्तर के लिए यहां क्लिक करें।
‘मुहावरा’ शब्द की उत्पत्ति और अर्थ :-
“Muhawara” shabd ki utpatti aur shabdik arth –
उत्तर – “मुहावरा” मूलतः अरबी भाषा के शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘बातचीत करना’ या ‘अभ्यास होना’ होता है। यह एक संज्ञा पुलिंग शब्द है।
मुहावरा का पर्यायवाची शब्द :- (Muhawara ka paryayvachi shabd )
– मुहावरा का पर्यायवाची शब्द वाक्-पद्धति, वाक्-रीति, कहावत, वाक्यांश, वाग्धारा, प्रयुक्तता, वाग्रीति, भाषा-सम्प्रदाय, वाक्य – व्यवहार, वाक् – सम्प्रदाय आदि हैं।
मुहावरा को अन्य भाषाओं में क्या कहा जाता है?
(Hindi Muhawara ko anya ko anya shabd men kya kaha jata hai.)
मुहावरा को विभिन्न भाषाओं में निम्नलिखित नाम है :-
हिंदी ——- मुहावरा ।
अंग्रेजी ——- Idiom.(Plural – Idioms)
नेपाली —– टुक्का या उखान टुक्का।
बंग्ला —– वाग्धारा (Bagdhara)।
मैथिली —— लोकोक्ति।
तमिल —– मुरैत्तौडर।
चीनी —- चेंग्यु (chengyu)
जापानी —- kanyoku.
मुहावरे का स्रोत:-
Muhawara ka shrot :-
– “मुहावरे के स्रोत” से तात्पर्य यह है कि हिन्दी आदि भाषाओं में प्रयुक्त मुहावरे कहां से आए हैं अथवा हिंदी भाषा में इसका समावेश कैसे हुआ? वास्तव में हिंदी में प्रयुक्त मुहावरे की उत्पत्ति एकाएक या एकसाथ नहीं हुई बल्कि समय के साथ ये इसमें जुड़ते गए और इसकी संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई।
हिंदी सहित समस्त भाषाओं में इसका समावेश मानव जीवन में घटने वाली विभिन्न घटनाओं से प्राप्त अनुभवों के आधार पर एक सिद्ध दृष्टिकोण के रूप में हुआ है। यह वर्तमान मानव जीवन और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से संबंधित घटनाओं, अनुभवों, मूल्यों, मान्यताओं, कथाओं, परम्पराओं, प्रसंगों आदि की पारस्परिक समानता अथवा पुनरावृत्ति और निष्कर्ष के आधार पर सिद्ध कथन अथवा वचन के रूप में उत्पन्न हुआ है। जिसका प्रयोग मनुष्य आत्मसुधार के लिए करते हैं। जैसे – “आंख मारना” मुहावरा पर ही विचार किया जाय तो यह हमारे लोक जीवन में घनिष्ठता पूर्वक जुड़ा हुआ है। इस मुहावरा का अर्थ होता है “इशारा करना”।
हमारे सामाजिक जीवन में प्रायः ऐसा देखा जाता है कि समूह में किसी व्यक्ति को चुप रहने अथवा बोलने अथवा पास बुलाने के लिए गुप्त रुप से आंखों को ऊपर-नीचे या खोल-मूंद कर संकेत किया जाता है ताकि जिसे संकेत किया जाय केवल वही समझे। यदि आंख मारने के बजाय बोलकर यह कार्य किया जाएगा तो यह बात गुप्त नहीं रहेगी।
इस प्रकार उक्त प्रकरण से यह सिद्ध होता है कि मुहावरा का स्रोत मानव जीवन से संबंधित विभिन्न घटना, मूल्य, मान्यता, लोक कथा, परम्परा, अनुभव आदि है।
मुहावरा की प्रमुख विशेषताएं बताएं।
Muhawara ki pramukh visheshataen batayen?
उत्तर – मुहावरा की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:-
1. मुहावरा (Hindi Muhawara) वाक्य का अंग या अंश होता है।
स्पष्टीकरण – इस कथन से यह तात्पर्य है कि मुहावरा का अस्तित्व वाक्य पर निर्भर करता है अर्थात वाक्य के बिना मुहावरे का न तो कोई स्वतंत्र अस्तित्व है और न ही स्वतंत्र अर्थ है। यह किसी वाक्य के अधीनस्थ रहकर ही अपने अस्तित्व को प्रकट करने में सफल होता है।
मुहावरे के इसी गुण के कारण इसे वाक्य का अंग माना जाता है। उदाहरण स्वरुप “आमचूर होना” का स्वतंत्र अर्थ हीनता का शिकार प्रतीत होता है। लेकिन वाक्य में प्रयोग करने पर इसका अर्थ “कमजोर होना” स्पष्ट होता है। जैसे:- चन्द्र मोहन की इकलौती बेटी चन्द्र मोहनी नित्य घी, दूध, दही, फल-फूल आदि खाकर भी शरीर से आमचूर ही लगती है।
2. मुहावरा (Hindi Muhawara) का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता है। अर्थात मुहावरा का स्वतंत्र रूप में प्रयोग नहीं होता है।
स्पष्टीकरण – इस कथन का तात्पर्य यह है कि यदि मुहावरा को वाक्य के बिना प्रयोग किया जाय तो उसके अर्थ में स्पष्ट हीनता और अनिश्चितता का प्रभाव पूर्ण रूप से परिलक्षित होने लगता है। यदि इसका प्रयोग स्वतंत्र अर्थात वाक्य रहित स्थिति में किया जाय तो इसके अर्थ में स्थायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जैसे – यदि “नौ दो ग्यारह होना” को स्वतंत्र रूप से यानी अकेले प्रयोग किया जाय तो हो सकता है कि इसका गणितीय पक्ष उजागर हो जाए अथवा यह सामान्य या शाब्दिक अर्थ धारण कर लें परन्तु हम जानते हैं कि “मुहावरा” कभी भी सामान्य अथवा शाब्दिक अर्थ के साथ प्रयुक्त नहीं होते हैं।
अत: उक्त संभावनाओं के कारण ही मुहावरे का वाक्य में सामान्य शब्दों के बजाय प्रभावकारी शब्द समूह के रूप में प्रयोग किया जाता है।
3. मुहावरा (Hindi Muhawara) वाक्य में प्रयुक्त “क्रिया” काल, कारक, लिंग, वचन आदि के अनुसार परिवर्तित हो जाता है।
स्पष्टीकरण – इस कथन का तात्पर्य यह है कि मुहावरे में प्रयुक्त “क्रियाएं” काल, लिंग, पुरुष, वचन आदि के अनुसार अपने स्वरूप में परिवर्तन लाते हैं। उदाहरण स्वरुप “नौ दो ग्यारह होना” को ही लिया जाए तो इसमें ‘होना’ क्रिया है। अब यदि किसी स्त्रीलिंग के साथ इसका प्रयोग किया जाएगा तो ‘होना’ का स्वरूप ‘हो गयी’ होगा। यदि किसी पुलिंग के साथ इसका प्रयोग किया जाएगा तो ‘होना’ का स्वरूप ‘हो गया’ होगा। जैसे:-
स्त्रीलिंग प्रयोग :- लक्ष्मण को देखकर सूर्पनखा नौ दो ग्यारह हो गई।
पुलिंग प्रयोग:- लक्ष्मण की शक्ति से भयभीत मेघनाद युद्धभूमि से नौ दो ग्यारह हो गया।
4. मुहावरा (Hindi Muhawara) की गणना पूर्ण वाक्य में नहीं होती है।
स्पष्टीकरण – मुहावरा एक वाक्यांश अर्थात वाक्य का अंश या खंड होता है। यह वाक्य के अंग के रूप में ही प्रयुक्त होते हैं। इसका स्वतंत्र रूप में प्रयोग नहीं होता है क्योंकि ऐसा करने से इसके अर्थ का स्थायित्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। इसलिए पूर्ण वाक्य के रूप में इसकी गणना नहीं होती है। दूसरी बात यह है कि इसमें वाक्य के अवयव जैसे कर्ता, कर्म, क्रिया आदि का भी अभाव पाया जाता है। इसलिए इसे सम्पूर्ण वाक्य के रुप में इसकी गणना व्याकरण सम्मत नहीं होगा।
5. मुहावरा(Hindi Muhawara) में प्रयुक्त किसी शब्द के स्थान पर उसके पर्यायवाची या समानार्थक या अन्य शब्दों का प्रयोग करना सर्वथा वर्जित है।
स्पष्टीकरण:- मुहावरे में प्रयुक्त शब्दों का एक स्थिर और स्थानीय अर्थ होता है। यदि इसके स्थान पर इसके पर्यायवाची शब्दों का चयन किया जाएगा तो मुहावरे के अर्थ पर उस पर्यायवाची शब्दों का प्रभाव पड़ सकता है और मुहावरे के अर्थ और स्वभाव में परिवर्तन की संभावना बन सकती है।
इसलिए मुहावरा में प्रयुक्त किसी शब्द का पर्यायवाची शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है या फिर प्रयोग करना वर्जित माना गया है। जैसे – ‘पानी पानी होना’ को ‘जल जल होना’ नहीं कहा जा सकता है। ‘नानी मर जाना’ के स्थान पर ‘दादी मर जाना’ नहीं कहा जा सकता है।
मुहावरा का प्रयोग क्यों किया जाता है? मुहावरा के प्रयोग करने से क्या लाभ होता है?
Muhawara ka prayog kyun kiya jata hai? Muhawara ke prayog se kya labh hai?
उत्तर – मुहावरा का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है:-
1. यह (Hindi Muhawara) वाक्य अथवा कथन को सामान्य शब्दों की अपेक्षा अधिक प्रभावी बनाता है।
जैसे:- समीर के कुकृत्य को देखकर उसके पिताजी आग बबूला हो गए। यहां “आग बबूला होना” के जगह यदि इसका अर्थ “अत्यधिक क्रोधित होना” लिखा जाता और वाक्य का स्वरूप ऐसा होता जैसे – “समीर के कुकृत्य को देखकर उसके पिताजी अत्यंत क्रोधित हो गए।” तो श्रोताओं को अधिक प्रभावी नहीं लगता।
2. यह(Hindi Muhawara) सामान्य शब्दों की अपेक्षा श्रोताओं को अधिक आकर्षित करता है।
जैसे – पुलिस को देखकर चोर नौ दो ग्यारह हो गया। यहां “नौ दो ग्यारह होना” मुहावरा का अर्थ “भाग जाना” होता है। लेकिन जब वक्ता (बोलने वाला) ऐसा कहता कि “पुलिस को देखकर चोर भाग गया।” तो लोगों में कौतूहल उत्पन्न नहीं होता। उसे यह सामान्य घटना लगता है। मुहावरे के उपयोग होने से लोगों में कौतूहल उत्पन्न होता है कि चोर ने पुलिस को कैसे देख लिया? पुलिस से छिपकर कैसे भाग गया? पुलिस पकड़ पाई या नहीं? चोर भागने में सफल कैसे हुए? पुलिस पहुंची कैसे?।
3. यह(Hindi Muhawara) भाषा को सजीव अथवा जीवंत बनाता है।
जैसे:- भाषा को सजीव अथवा जीवंत बनाने से तात्पर्य यह है कि भाषा का परिवर्तन अथवा सुधार के दौर से गुजरना। जिस प्रकार कोई निर्जीव वस्तु किसी सजीव पर प्रभाव डालने में प्राय: असमर्थ रहता है उसी प्रकार प्रभावहीन भाषा श्रोताओं अथवा पाठकों को प्रभावित करने में असमर्थ रहती है। अतः मुहावरे आदि ऐसी स्थिति में अपने कौतूहल, शाब्दिक रहस्य, जटिलताओं आदि से श्रोताओं अथवा पाठकों के मन अर्थबोध के लिए बाध्य करते हैं।
आइए इस कथन को एक सामान्य उदाहरण के द्वारा समझने का प्रयत्न करते हैं जैसे – भ्रष्टाचार नेताओं और अधिकारियों के नाक के बाल है। यहां “नाक का बाल होना” एक मुहावरा है जो सामान्य लोगों में कौतूहल उत्पन्न करता है। कुछ लोग इसके अर्थ को लेकर जिज्ञासु हो उठते हैं। इस प्रकार यह भाषा के जीवंत प्रभाव श्रोताओं अथवा पाठकों पर डालते हैं।
4. यह(Hindi Muhawara) भाषा के सौंदर्य – वृद्धि में सहायक सिद्ध होता है।
जैसे – मुहावरा प्रायः अपने शाब्दिक अर्थ से अलग अर्थ धारण करता है। ऐसी स्थिति में इसका प्रयोग इसके मर्मज्ञ ही सफलतापूर्वक कर पाते हैं। भाषा का सामान्य समझ रखने वाले न तो इसका सदुपयोग कर पाते हैं और न ही इसके मर्म को समझ पाते हैं। ऐसी स्थिति में भाषाई विविधता और उसकी प्रभावोत्पादक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है परिणामस्वरूप भाषा मृतप्राय प्रतीत होता है। जब भाषाओं में मुहावरे का समावेश किया जाता है तो पाठकों अथवा श्रोताओं के मन में लेखक अथवा वक्ताओं के प्रति एक उन्नत दृष्टिकोण का विकास होता है। यह भाषाओं में कौतूहल, रहस्य, जिज्ञासा, एकाग्रता, चिन्तन आदि आवश्यक सद्गुणों का श्रीगणेश करता है।
5. यह (Hindi Muhawara) भाषाई रोचकता को बढ़ावा देता है।
जैसे:- अपने दैनिक जीवन में हमारे सामने प्रायः ऐसे उदाहरण उपस्थित होते हैं जिसमें हम देखते हैं कि लोगों पर सामान्य शब्दों की अपेक्षा विशेष या अटपटे या अपरिचित शब्दों का प्रभाव अधिक पड़ता है। यह स्थिति किसी एक स्थान विशेष की परिधि तक सीमित नहीं है बल्कि यह भाषा के अन्य पक्षों पर भी लागू होती है। मुहावरे की प्रकृति भी कुछ ऐसी ही है हालांकि इनके शब्द सामान्य अवश्य होते हैं परन्तु इनके अर्थ प्रायः शब्दों की परिधि से परे होते हैं। मुहावरे की इसी असंगत अर्थ के कारण इसके आकर्षण में वृद्धि होती है और पाठकों में किसी पाठ या साहित्यिक रचना के सम्पूर्ण पठन के लिए विशेष अभिरुचि उत्पन्न करते हैं।
किसी साहित्यिक रचना या बातचीत या संवाद लेखन में मुहावरा के प्रयोग नहीं करने से उनमें क्या अंतर अथवा परिवर्तन आएगा?
– किसी साहित्यिक रचना या बातचीत या संवाद लेखन में मुहावरा के प्रयोग नहीं करने से उनमें निम्नलिखित अंतर अथवा परिवर्तन आएगा :-
1. भाषा रसहीनता का शिकार हो जाएगी।
स्पष्टीकरण:- मुहावरों के प्रयोग करने से भाषा सरस अर्थात आकर्षक और सुरुचिपूर्ण होता है। यदि मुहावरा का प्रयोग नहीं किया जाय तो भाषा में नीरसता का दोष सुस्पष्टतापूर्वक परिलक्षित होने लगता है। उदाहरण स्वरुप – इकलौते पुत्र के निधन से जयगोविंद शास्त्री का कमर टूट गया। इस वाक्य में “कमर टूटना” मुहावरा प्रयुक्त हुआ है। वहीं इस वाक्य को मुहावरा रहित लिखने पर “इकलौते पुत्र के निधन से जयगोविंद शास्त्री आश्रयहीन हो गया।” होता है। यहां पहला वाक्य जितना सरस और प्रभावशाली प्रतीत होता है दूसरा वाक्य उतना ही सामान्य और प्रभावहीन लगता है।
2. भाषा प्रायः यांत्रिक अथवा मस्तिष्कहीन प्रतीत होगा।
स्पष्टीकरण:- मुहावरा रहित भाषाएं प्रायः वैयक्तिक चतुराई से विहीन अर्थात मस्तिष्कहीन प्रतीत होगा। इस कथन से मूल तात्पर्य यह है कि मुहावरा रहित भाषाएं यांत्रिक उपकरणों जैसे – कंप्यूटर, साफ्टवेयर, ट्रांसलेटर, रोबोट आदि से निकला हुआ प्रतीत होगा। क्योंकि भाषा में मुहावरे का समावेश मानवीय भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। हम जानते हैं कि मानव के विविध भावनाओं को व्यक्त करने में मुहावरा से अधिक सशक्त और प्रभावशाली साहित्यिक सृष्टि अन्यत्र सामर्थ्यवान नहीं।
उदाहरण स्वरुप “माता-पिता की बातों पर कान दो।” और “माता-पिता की बातों पर ध्यान दो।” यहां दोनों वाक्य के उद्देश्य में पर्याप्त समानता है परन्तु मुहावरा के प्रयोग के कारण पहला वाक्य बच्चों पर अधिक प्रभावकारी सिद्ध होगा। यह ऐसी अनुभूति प्रदान करता है कि कोई बच्चों को आदेश दे रहा है।
3. सांस्कृतिक धरोहर की कमजोरी का संदेश जाएगा।
स्पष्टीकरण:- मुहावरा(Hindi Muhawara) की जड़ें प्रायः साधारण लोक जीवन की पृष्ठभूमि से जुड़ी होती है और वह किसी न किसी रूप में इसका प्रतिनिधित्व भी करता है। इसका उदाहरण हमें “मुख में राम बगल में छुरी” मुहावरा से भी मिलता है। यह “राम” हमारे महान सांस्कृतिक धरोहर का पल प्रति पल दैदीप्यमान ज्योतिपुंज है जिसके नाम का प्रयोग हमारे यहां पारस्परिक अभिवादन में “राम..राम” के रूप में किया जाता है।
इस मुहावरा से वैसे कपटी मित्र का परिचय प्राप्त होता है जो सामने से आदर-सम्मान पूर्वक व्यवहार करते हैं परन्तु परोक्ष होते ही अपने मित्र को हानि पहुंचाने का प्रयत्न करने लगते हैं। यदि “कपटी मित्र” के लिए ऐसे मुहावरे के प्रयोग को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी तो धीरे-धीरे हमारी संस्कृति अवक्षरण का शिकार हो जाएगा।
4. भाषा में व्यक्ति आधारित विविधता का अभाव हो जाएगा।
स्पष्टीकरण:- इस कथन से तात्पर्य यह है कि व्यक्तियों के व्यक्तित्व के आधार पर भाषा में विविधता की संभावना अधिक से अधिक होती है। यदि मुहावरा(Hindi Muhawara) और पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग की परिधि सीमित हो जाएगी तो इस विविधता पर संकट आना सुनिश्चित है। परिणाम स्वरुप भाषा में साम्यता अर्थात पुनरावृत्ति का दोष सुस्पष्टता पूर्वक परिलक्षित होने लगेगा यानी सभी लोग यंत्रवत मिलते-जुलते भाषा का प्रयोग करने लगेंगे। अतः भाषा की विविधता को शाश्वत रखने के लिए उसमें मुहावरे का समावेश सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष है।
5. लेखक अथवा वक्ता के मानसिक दशा के मूल्यांकन में कठिनाइयां आएगी।
स्पष्टीकरण – सामान्यतः लोग मुहावरे का प्रयोग क्रोध, प्रसन्नता, दुःख, पीड़ा, लज्जा, व्यंग्य जैसे प्रबल अथवा भावनात्मक मनोदशा में करते हैं। मुहावरे के प्रयोग से उसके मनोभाव को भांपने में आसानी होती है तत्पश्चात उस अनुकूल प्रतिक्रिया देना सरल होता है। यदि उस दशा में व्यक्ति के द्वारा सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाएगा तो न केवल उसके मनोभाव या मनोदशा को समझने में कठिनाई होगी बल्कि उसके अपेक्षा के अनुरूप प्रतिक्रिया देने में भी कठिनाई होगी।
इसका उदाहरण हमें फिल्मों में भी देखने को मिलता है। जैसे – फिल्म में प्रायः खल पात्र अपने किसी साथी के कपट को जानने के बाद उसे कहते हैं कि “शाका… तुम जैसे नमक हरामों के लिए शाका की अदालत में एक ही फैसला होता है और वह है मृत्युदंड।” यही संवाद यदि मुहावरा विहीन होगा तो उसका स्वरूप ऐसा होगा “शाका… तुम जैसे कपटी के लिए शाका की अदालत में एक ही फैसला होता है और वह है मृत्युदंड।” जो पहले वाले वाक्य की अपेक्षा सामान्य प्रतीत होता है और ‘मौत’ का दंड अनुचित लगता है। ऐसी स्थिति में वक्ता के मनोदशा की चरम सीमा का पता लगाना थोड़ा कठिन होता है कि वक्ता कितने गुस्सा में है?।
प्रिय पाठक बंधु! इस पोस्ट में मैंने केवल मुहावरा (Muhawara) की परिभाषा, उत्पत्ति, शाब्दिक अर्थ, पर्यायवाची, विशेषताएं, गुण आदि का परिचय दिया है। इसके अगली कड़ी में लोकोक्ति का परिचय आदि की चर्चा करेंगे। इसके पश्चात मुहावरा (muhawara) और लोकोक्ति (Lokokti) में अंतर आदि का वर्णन किया जाएगा।