नागरी लिपि

प्रिय शिक्षार्थियों! Vidyapuri.in के इस पेज पर आपके समक्ष एक नये अध्याय “नागरी लिपि” की प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत कर रहा हूं। आपके महत्वपूर्ण सुझाव की प्रतीक्षा रहेगी। 

प्रश्न संख्या – 1

देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है?

उत्तर – देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता इनके टाइप बनने और उस टाइप से पुस्तकों के छपने से आयी है।

स्पष्टीकरण:- प्रश्न का उद्देश्य छात्रों से यह जानना है कि ‘देवनागरी लिपि में एकरूपता कैसे आई।’ वास्तव में जब टाइप यानि लकड़ी या “धातु के एक सतह पर खुदाई कर अक्षर की उभार वाले पट्ट”(जैसे – स्कूल के प्रधानाध्यापक का मुहर) का निर्माण हुआ तब जाकर किताबें छपने लगी। जब किताबें छपने लगी तब लोगों के द्वारा उनका अनुसरण किया जाने लगा। चूंकि सभी टाइप का अक्षर, बनावट की दृष्टि से समान होते थे। अतः लोगों का पहली बार समान अक्षरों से परिचय हुआ और सभी अपने लेखन में भी उनका अनुसरण करने लगे, अन्यथा पहले जितने व्यक्ति लिखते थे उतने तरीके विकसित हो जाया करते थे जिस कारण अक्षरों में व्यापक भिन्नताएं आ जाया करती थीं।

प्रश्न संख्या – 2

देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएं लिखी जाती हैं?

उत्तर – देवनागरी लिपि में हिन्दी, संस्कृत, मराठी, भोजपुरी, मैथिली, नेपाली आदि भाषाएं लिखी जाती हैं।

प्रश्न संख्या – 3

लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?

उत्तर – लेखक गुणाकर मुले ने गुजराती, बंग्ला आदि लिपियों के साथ – साथ तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़ इत्यादि भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।
स्पष्टीकरण:- लेखक गुणाकर मुले जी ने इस संबंध में बताया है कि गुजराती लिपि देवनागरी से अधिक भिन्न नहीं है। बांग्ला लिपि प्राचीन नगरी लिपि की पुत्री नहीं, तो बहन अवश्य है। हां, दक्षिण भारत की लिपियां वर्तमान नागरी लिपि से काफी भिन्न दिखाई देती है, लेकिन यह तथ्य हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए कि आज कुछ भिन्न – सी दिखाई देने वाली दक्षिण भारत की तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़ आदि लिपियां भी देवनागरी की तरह प्राचीन ब्राह्मी लिपि से ही विकसित हुई है। इस आधार पर इन भारतीय लिपियों का देवनागरी लिपि का संबंध बताया गया है।

प्रश्न संख्या – 4

नंदी नागरी किसे कहते हैं ? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है ?

उत्तर – दक्षिण भारत से प्राप्त आरम्भिक नागरी लिपि को ‘नंदी नागरी’ कहते हैं। सर्वप्रथम विजयनगर के शासकों के लेख में प्रयुक्त लिपि को ‘नंदी नागरी’ नाम से संबोधित किया गया था।
                               लेखक ने नागरी लिपि के आरम्भिक लेख और दक्षिण भारत से उसके मौलिक संबंध के प्रसंग में उसका उल्लेख किया है।

प्रश्न संख्या – 5

नागरी लिपि के आरम्भिक लेख कहां प्राप्त हुए हैं? उसका विवरण दें।

उत्तर – नागरी लिपि के आरम्भिक लेख दक्षिण भारत में प्राप्त हुए हैं। इसके विवरण स्वरूप लेखक के द्वारा दक्षिण भारत स्थित कोंकण के शिलाहार, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरी के यादव शासकों के साथ – साथ विजयनगर के शासकों के लेख प्रस्तुत किया गया हैं।

प्रश्न संख्या – 6

ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है?

उत्तर – ब्राह्मी और सिद्धम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान इनके अक्षरों की लंबी शिरोरेखाएं हैं, जो प्रायः अक्षरों की चौड़ाई के बराबर होती हैं। जबकि ब्राह्मी और सिद्धम लिपि के अक्षरों की ‘शिरोरेखाएं’ छोटी-आड़ी या फिर ठोस त्रिकोण के समान होती हैं।

प्रश्न संख्या – 07

उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं?

उत्तर – उत्तर भारत में गुहिल, चौहान, गाहड़वाल, सोलंकी, परमार, चंदेल, कलचुरि आदि शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं।

प्रश्न संख्या – 8

नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं ? लेखक इस संबंध में क्या बताता है?

उत्तर – नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं? इस संबंध में लेखक बताता है कि ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक में पाटलिपुत्र का उल्लेख ‘नगर’ के रूप में हुआ है और गुप्त वंश के प्रतापी सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, तो हो सकता है कि गुप्त वंश की राजधानी ‘पाटलिपुत्र’ को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा तथा ‘देवनगर’ में प्रयुक्त होने के कारण नागरी लिपि ‘देवनागरी लिपि’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया होगा।

प्रश्न संख्या – 9

नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है ? पटना से नागरी का क्या संबंध लेखक बताया है ?

उत्तर – नागरी की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का कहना है कि विद्वानों के बीच इस विषय को लेकर व्यापक मतभेद है। कुछ विद्वानों ने गुजरात के ‘नागर ब्राह्मण’ से इनका संबंध बताया है, तो कुछ विद्वान काशी के पक्ष में अपना तर्क देते हुए कहते हैं कि बाकी नगर सिर्फ नगर है परन्तु ‘काशी’ देवनगरी है, इसलिए काशी में प्रयुक्त होने के कारण इसका नाम ‘देवनागरी’ पड़ा होगा।
                          पटना से नागरी के संबंध  का उल्लेख करते हुए लेखक ने बताया है कि ‘पादताडितकम्’ नामक नाटक में पाटलिपुत्र का परिचय ‘नगर’ के रूप में मिलता है और गुप्त वंश के प्रतापी सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य का व्यक्तिगत नाम ‘देव’ था, तो हो सकता है कि गुप्त वंश की राजधानी ‘पाटलिपुत्र’ को ‘देवनगर’ भी कहा जाता होगा तथा ‘देवनगर’ में प्रयुक्त होने के कारण नागरी ‘देवनागरी लिपि’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया होगा।

प्रश्न संख्या – 10

नागरी लिपि कब एक सार्वदेशिक लिपि थी ?

उत्तर – नागरी लिपि आठवीं से ग्यारहवीं सदी के बीच एक सार्वदेशिक लिपि थी।

प्रश्न संख्या – 11

नागरी लिपि के साथ – साथ किसका जन्म होता है ? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देता है ?

उत्तर – नागरी लिपि के साथ – साथ भारतीय इतिहास और संस्कृति के एक नये युग का जन्म होता है। इस संबंध में लेखक जानकारी देता है कि भारत इस्लाम के संपर्क में आता है। तेरहवीं सदी में यहां इस्लामी शासन का नींव पड़ता है और भारतीय समाज और इसमें व्याप्त विविध सम्प्रदायों को ‘हिंदू समाज’ और ‘हिंदू धर्म’ की संज्ञा मिलती है।

प्रश्न संख्या – 12

गुर्जर प्रतीहार कौन थे ?

उत्तर – लेखक ने ऐतिहासिक प्रमाण प्रस्तुत करते हुए बताया है कि गुर्जर प्रतीहार विदेशी थे। उन्होंने सर्वप्रथम भारत के अवंती प्रदेश पर अपने शासन की नींव डाली। अवंती प्रदेश के बाद उन्होंने कन्नौज पर भी अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। मिहिर भोज, महेन्द्र पाल आदि प्रसिद्ध प्रतीहार शासक थे।

पाठ के आस – पास

भाषा और लिपि में क्या अंतर है? इस विषय पर शिक्षक से चर्चा करें।

उत्तर – भाषा और लिपि में निम्नलिखित अंतर हैं :-

भाषा : –

1. भाषा विचारों के आदान-प्रदान का साधन है।

2. हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी, पंजाबी, तमिल आदि भाषाएं हैं।

3. भाषा का प्रयोग लेखन और वाचन दोनों स्वरूपों में होता है।

4. भाषा की सबसे छोटी इकाई ‘ध्वनि’ होती है।

5. भाषा (मौखिक) अदृश्य और अस्थायी भी होती हैं।

लिपि :-

1. लिपि भाषाओं के लिखित स्वरूप में प्रयुक्त ध्वनि – चिन्ह या संकेत है।

2. देवनागरी, रोमन, गुरुमुखी, कैथी आदि लिपियां हैं।

3. लिपि का प्रयोग केवल लेखन में होता है।

4. लिपि की सबसे छोटी इकाई ‘वर्ण’ या ‘अक्षर’ है।

5. लिपि हमेशा दृश्य और स्थायी होती है।

भाषा की बात :-

1.निम्नलिखित शब्दों से संज्ञा बनाएं –

स्थिर का संज्ञा क्या होगा?

– स्थिरता

अतिरिक्त का संज्ञा क्या होगा?

– अतिरिक्तता

स्मरणीय का संज्ञा क्या होगा?

– स्मरण

दक्षिणी का संज्ञा क्या होगा?

– दक्षिण

आसान का संज्ञा क्या होगा?

– आसानी

पराक्रमी का संज्ञा क्या होगा?

– पराक्रम

युगीन का संज्ञा क्या होगा?

– युग

2.निम्नलिखित शब्दों का समासविग्रह करें-

तमिल-मलयालम का समास विग्रह करें।

– तमिल और मलयालम ( द्वंद्व समास)

रामसीय का समास विग्रह करें।

– राम और सीता/सिया ( द्वंद्व समास)

विद्यानुराग का समास विग्रह करें।

– विद्या से अनुराग (तत्पुरुष समास या पंचमी तत्पुरुष)

शिरोरेखा का समास विग्रह करें।

– सिर पर स्थित रेखा,  तत्पुरुष समास (षष्ठी तत्पुरुष समास)

हस्तलिपि का समास विग्रह करें।

– हाथ से लिखी गई लिपि, तत्पुरुष समास (तृतीया तत्पुरुष समास)

दोहाकोष का समास विग्रह करें।

– दोहा का कोष, तत्पुरुष समास (संबंध तत्पुरुष समास)

पहले – पहल का समास विग्रह करें।

– सबसे पहले, अव्ययीभाव समास

3.निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखें।

मत का पर्यायवाची शब्द बताएं?

– राय, विचार, ख्याल आदि मत के पर्यायवाची शब्द हैं।

सार्वदेशिक का पर्यायवाची शब्द लिखें।

– विश्वव्यापी, विश्वव्याप्त, सर्वदेशसंबद्ध आदि सार्वदेशिक का पर्यायवाची शब्द हैं।

अनुकरण का पर्यायवाची शब्द लिखें।

– देखा-देखी, नकल, प्रतिकृति आदि अनुकरण का पर्यायवाची शब्द हैं।

व्यवहार का पर्यायवाची शब्द लिखें।

– आचरण, प्रयोग, चलन आदि व्यवहार का पर्यायवाची शब्द हैं।

शासक का पर्यायवाची शब्द लिखें।

– राजा, नरेश, नरेंद्र, सम्राट आदि शासक का पर्यायवाची शब्द हैं।

4. निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ स्पष्ट करें।

(क) प्रत्न – प्रयत्न (प्रत्न – प्राचीन, प्रयत्न – प्रयास)
(ख) लिपि – लिप्ति ( लिपि – ध्वनि संकेत, लिप्ति – लेपन)
(ग) नागरी – नागरिक ( नागरी – एक लिपि का नाम, नागरिक – किसी देश या नगर के वासी)
(घ) पट – पट्ट ( पट – वस्त्र, कपड़ा, पट्ट – लकड़ी का समतल सतह, तख्ता)

पाठ से संबंधित कुछ पारिभाषिक शब्द एवं उनकी परिभाषाएं :-

बोली :-

किसी क्षेत्र विशेष में प्रयुक्त भाषा की छोटी इकाई को ‘बोली’ कहते हैं। जैसे:- अवधि, ब्रज, हरियाणवी आदि हिन्दी की ‘बोली’ है।

नोट :- बोली को ‘उप भाषा’ भी कहा जाता है।

नेवारी भाषा :-

– नेपाल स्थित नेवारी जाति से संबंधित नेपाली भाषा को नेवारी भाषा कहते हैं। इसे ‘नेपाल भाषा’ के नाम से भी जाना जाता है। यह ‘चिनी-तिब्बती परिवार’ से संबंधित एकमात्र ऐसी भाषा है जो ‘देवनागरी लिपि’ में लिखी जाती हैं।
नोट :- नेपाल भाषा/नेवारी और नेपाल की राष्ट्रभाषा ‘नेपाली’ दोनों अलग-अलग हैं।

नेपाली :-

‘नेपाली’ नेपाल की राष्ट्रभाषा है जिसकी लिपि देवनागरी है। यह भाषा नेपाल की राष्ट्रभाषा होने के साथ – साथ भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल ‘भारत का राजभाषा’ भी है। नेपाली भाषा के आदि कवि ‘भानु भक्त आचार्य’ है।

नोट :- नेपाली भाषा को खसकुरा, परवतिया, गोरखाली आदि नामों से भी जाना जाता है।

‘ळ’ वर्ण क्या है?

– ‘ळ’ एक प्राचीन और वैदिक वर्ण है जिसका उपयोग आज के मराठी, कोंकणी आदि भाषाओं में किया जाता है। इसका उच्चारण हिन्दी के ‘ड़’ की भांति होती है। कुछ विद्वानों के अनुसार इसका उच्चारण ल और ड़ के बीच होता है।

अभिलेख :-

पत्थरों या धातुओं के ठोस सतह पर नुकिले छेनी या अन्य औजारों की सहायता से लिखित पाठ्य सामग्री को अभिलेख कहते हैं। प्राचीनकाल के शासकों के द्वारा किसी आदेश, उपलब्धि, संस्मरण आदि को दर्शाने के लिए अभिलेख तैयार करवाए जाते थे। सम्राट अशोक के 33 अभिलेख प्राप्त हुए हैं।कालान्तर में कागजों, कपड़ों आदि पर भी अभिलेख तैयार किए जाने लगे। अभिलेख तैयार करने का भी एक सर्वमान्य सिद्धांत था। इस सिद्धांत के अनुसार अभिलेख के आरंभिक चरण में किसी धार्मिक/मांगलिक चिन्ह या शब्द से लेखन की शुरुआत की जाती थी। द्वितीय चरण में किसी देवता की स्तुति या उनका आवाहन किया जाता था। तृतीय चरण में आशीर्वादात्मक या मांगलिक संदेश होता था। चतुर्थ चरण में कर्म – कृति या दान – धर्म का वर्णन होता था। पंचम चरण में दान भंग या कृति भंग करने वाले पुरुष की निंदा होती थी। अंतिम चरण में उपसंहार होता था। सबसे नीचे एक भाग में अभिलेख तैयार करवाने वाले का नाम और कोई मांगलिक चिन्ह होता था तथा दूसरे भाग में लेखक का नाम होता था। हालांकि यह नियम राजकाज से संबंधित अभिलेख पर लागू होता था। परन्तु वर्तमान काल में जमीन – जायदाद आदि से संबंधित लेखा-जोखा को भी अभिलेख की श्रेणी में ही रखा गया है।
नोट :- अभिलेख का अध्ययन करना ‘एपिग्राफी’ कहलाता है।

संस्कृत – प्राकृत :-

संस्कृत हिन्दू, बौद्ध, जैन आदि धर्मों की ‘धर्म भाषा’ है। संस्कृत भाषा की व्याकरण व्यवस्था समृद्ध और जटिल है। जबकि ‘प्राकृत’ मूल संस्कृत / वैदिक संस्कृत से उत्पन्न भाषा है जो मध्ययुगीन भारत (कालखंड – 600 ईपू से 1000ई) के आम लोगों के द्वारा प्रयोग में लाया जाता था।

पोथी क्या है? पोथी किसे कहते हैं? पोथी से आप क्या समझते हैं?

– सामान्यतः धार्मिक या नैतिक शिक्षा पर आधारित छोटी पुस्तक को पोथी कहते हैं। इसके छोटे बच्चों के आरम्भिक शिक्षा के दौरान अभिभावकों और शिक्षकों प्रायः बाल पोथी या मनोहर पोथी का प्रयोग किया जाता है।

कोंकण

– कोंकण महाराष्ट्र और गोवा के पश्चिमी भाग स्थित तटीय क्षेत्र है जहां कभी शिलाहार राजवंश का शासन था।

मान्यखेट

– कर्नाटक राज्य के गुलबर्ग जिले के कगिना नदी स्थित वह क्षेत्र है जहां राष्ट्रकूट वंश के शासकों ने 818 ई. से 982 ई. तक शासन किए थे।

देवगिरी

– देवगिरी वर्तमान महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है। अब यह ‘दौलताबाद’ के नाम से जाना जाता है। यह 9वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी तक यादव वंश के राजाओं की राजधानी थी। यादव वंश के बाद यहां अलाउद्दीन खिलजी ने शासन किया। मुहम्मद बिन तुगलक ने इसका नाम देवगिरी से दौलताबाद कर दिया।

विजयनगर

– विजयनगर मध्यकालीन भारत का एक प्रमुख साम्राज्य था जिसकी स्थापना हरिहर राय और बुक्का राय के द्वारा संभवतः 1336 ई. में की गई थी। लगभग 1646 ई. में इस साम्राज्य का पतन हुआ। इसका अवशेष कर्नाटक राज्य के हम्पी शहर के समीप अभी भी मौजूद है।

सिक्का

– धातुओं की मुद्रा को सिक्का कहते हैं।

वरगुण कौन थे?

– वरगुण पांड्य प्रदेश या पांड्य वंश के शासक थे। एक अय वंश में भी विक्रमादित्य “वरगुण” हुए, जो पहले पाण्ड्य शासक  वरगुण द्वितीय के जागीरदार थे और बाद में अय वंश के शासक बने थे। विक्रमादित्य ‘वरगुण’ भी अपने ‘वरगुण’ उपनाम से ही प्रसिद्ध थे। इतना ही नहीं दक्षिण भारत स्थित पाण्ड्य वंश के कई शासक “वरगुण” के नाम या उपनाम से प्रसिद्ध थे। अतः ऐसी स्थिति में दुविधाग्रस्त होना स्वाभाविक है। परन्तु पलियम ताम्रपत्र का संबंध पांड्यवंश के ‘वरगुण’ से बताया जाता है, इस स्वीकार्यता के कारण दुविधा बहुत हद तक दूर हो गयी है। प्रसिद्ध इतिहासकार एमजीएस नारायणन के अनुसार वरगुण का पलियम ताम्रपत्र 898 ई. के आसपास का है।

टकसाल

– वह कारखाना जहां सामान्यतः धातुई मुद्राओं का निर्माण किया जाता है, उसे टकसाल कहते हैं। एक रुपया का पहला सिक्का कलकत्ता के टकसाल से 19 अगस्त 1757 ई. में इस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा तैयार किया गया था। आजादी के बाद 1950 ई. तक ब्रिटिश सरकार का सिक्का ही प्रचलन में था लेकिन 1950 ई. में स्वतंत्र भारत का पहले सिक्का का निर्माण हुआ। एक रुपया का पहला सिक्का 1962 ई. में चलन में आया था जो आज भी चल रहा है।

कलमा क्या है? कलमा किसे कहते हैं? कलमा से आप क्या समझते हैं?

– इस्लाम धर्म के मूल मंत्र को कलमा कहते हैं। इस्लाम धर्म में मुख्यतः 6 कलमों जिक्र किया गया है।

कुफी लिपि क्या है? कुफी लिपि किसे कहते हैं? कुफी लिपि से आप क्या समझते हैं?

– कुफी लिपि प्राचीन अरबी शैली की लिपि है। यह अपनी विशिष्ट शैली और सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध थी। कुरान का प्रतिलेखन कुफी लिपि में ही हुआ था। इराक के ‘कुफा’ नामक शहर के नाम पर इस लिपि का नामकरण हुआ है।

आबु

– आबू वर्तमान में माउंट आबू के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में यह भारत के राजस्थान के सिरोही जिला में प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के रूप में अवस्थित है। यहां परमार वंश ने 10 वीं से 13 वीं शताब्दी तक शासन किया। उस समय इसका विस्तार दक्षिणी राजस्थान से उत्तरी गुजरात के बड़े क्षेत्रों तक था। परमार वंश का संस्थापक धूमराज था। तात्कालिक आबू की राजधानी चन्द्रवती थी।

जेजाकभुक्ति

– जेजाकभुक्ति बुंदेलखंड का प्राचीन नाम है। वैसे बुंदेलखंड जेजाकभुक्ति के साथ जिझौती के नाम से भी जाना जाता था। बुंदेलखंड का यह जेजाकभुक्ति नाम प्रसिद्ध चंदेल शासक जयशक्ति जेजाक के नाम पर पड़ा था।

शिरोरेखा

– देवनागरी लिपि के अक्षरों के सिर या शिखर पर प्रयुक्त रेखा को शिरोरेखा कहा जाता है। यह शिरोरेखाएं प्रायः अक्षरों की चौड़ाई के बराबर हुआ करती हैं। शिरोरेखा का संधि विच्छेद शिर: + रेखा = शिरोरेखा होता है।

अलबेरुनी कौन थे ?

– अलबेरुनी एक विद्वान इतिहासकार थे। वे अरबी, फारसी के साथ – साथ सीरियाई, संस्कृत, यूनानी भाषा के अच्छे जानकार थे। उनकी रचनाएं अरबी भाषा में है। उनका जन्म 973 ई. में (ख्वारिज्म में) वर्तमान उज्बेकिस्तान हुआ था। वे मुहम्मद गजनवी के साथ भारत आए थे। उसने 1030 ई. में तात्कालिक भारतीय समाज में प्रचलित धर्म, दर्शन, त्योहार, रीति-रिवाज, प्रथा, सभ्यता – संस्कृति, न्याय व्यवस्था, भाषा आदि पर आधारित ‘किताब – उल – हिंद’ नाम की एक पुस्तक लिखी। अरबी भाषा में लिखित इस पुस्तक में कुल 80 अध्याय हैं। किताब – उल – हिंद को “तहकीक – ए – हिन्द” या ” तारीख – उल – हिंद” के नाम से भी जाना जाता है। इसका अर्थ ‘भारत के दिन’ होता है। अंग्रेजी में इसे “एन इंक्वायरी इनटू इंडिया” भी कहा जाता है। अलबेरुनी का निधन अफगानिस्तान के गजनी शहर में 13 दिसंबर 1048 ई. में हुआ था।

पादताडितकम् क्या है?

– ‘पादताडितकम्’ महाकवि श्यामलिक द्वारा विरचित एक अंकीय एकल अभिनित नाटक(इसमें एक ही पात्र द्वारा अभिनय किया जाता है।) है। “पादताडितकम्” का शाब्दिक अर्थ “पैर से मारा हुआ” होता है। संस्कृत में पादताडितकम् , पद्मप्राभृतक, धूर्तविटसंवाद और उभयभिसारिका के रूप में चार प्रसिद्ध भाण है जिन्हें सम्मिलित रूप से “चतुर्भाणी” के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है। इन चारों में सबसे बड़ा भाण पादताडितकम् ही है।
            पादताडितकम् नामक नाटक में विष्णुनाग नामक एक ब्राह्मण नवयुवक और मदनसेना नामक लोकप्रिय वेश्या की कथा है। अत्यंत रूपवती मदनसेना ने अल्हड़ता वश ब्राह्मण कुमार विष्णुनाग के सिर को अपने पैरों स्पर्श कर लिया। विष्णुनाग ने इस स्पर्श को अपना अपमान मानते हुए मदनसेना के लिए कठोर वचनों का प्रयोग करते हुए कहा कि हे लज्जाहीन अज्ञानी नारी ! तुझ पर धिक्कार है। तुने मेरे उस सिर पर अपना पैर लगाया जिस पर मेरी माता ने सधे हाथों से यत्नपूर्वक चोटी गूंथी थी। जिस पर हाथ फेरते हुए पिता कहते हैं क्या भोला लड़का है ? और जिस पर ब्राह्मणों ने फूल चढ़ाकर शांति का जल छिड़का था। क्या तुम्हें उसके गौरव का तनिक परवाह नहीं जो घमंड से भरा पैर उस पर रख दिया? मदनसेना को भी अपने इस कुकृत्य का अनुभव होता है। वह पश्चाताप की अग्नि में जलने लगती है। विष्णुनाग प्रायश्चित की खोज में लग जाते हैं।

स्थापत्य शैली

– भवन निर्माण से संबंधित वह ऐतिहासिक शैली जो किसी क्षेत्र विशेष के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, दार्शनिक आदि आधारित उन्नतिशील मूल्यों अथवा विचारों को दर्शाती है, उसे स्थापत्य शैली कहते हैं। भारत के प्रमुख स्थापत्य शैली के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं :-
नागर शैली – यह उत्तर भारत का प्रसिद्ध स्थापत्य शैली है, जो हिन्दू मंदिरों के गर्भगृह, मंडप, गुंबद आदि से संबंधित है।
द्रविड़ शैली – यह दक्षिण भारत से संबंधित एक ऐतिहासिक शैली है।
वेसर शैली – यह नागर शैली और स्थापत्य शैली का संयुक्त शैली है।
कलिंग वास्तुकला शैली – यह शैली उड़ीसा और आन्ध्र प्रदेश से संबंधित है। इसमें तीन प्रकार के मंदिर है।
कदंब शैली – यह दक्षिण भारत की सबसे प्राचीन शैली है। इसकी उत्पत्ति कर्नाटक में कदंब राजवंश के शासनकाल में हुआ था।

मालवा कहां है?

– मालवा वर्तमान भारत के मध्यप्रदेश के पश्चिमी भाग में एक पठार पर स्थित है। इसे भारत के हृदय स्थल के रूप में जाना जाता है।

वाकाटक क्या है?

– वाकाटक भारत का एक प्राचीन राजवंश है जिसकी स्थापना दक्कन के क्षेत्र में विंध्यशक्ति के द्वारा किया गया था।

सम्प्रदाय से आप क्या समझते हैं?

– किसी धर्म में अलग-अलग विचारधाराओं को प्रथा या परम्परा के रूप में मानने वाले समूह को सम्प्रदाय कहते हैं।
जैसे :- शैव, वैष्णव, शाक्त, स्मार्त आदि हिंदू धर्म के सम्प्रदाय हैं। शिया, सुन्नी, अहमदिया आदि इस्लाम धर्म के सम्प्रदाय हैं। थेरवाद, महायान, वज्रयान आदि बौद्ध धर्म के सम्प्रदाय हैं। श्वेताम्बर और दिगंबर जैन धर्म के सम्प्रदाय हैं। रोमन कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म के सम्प्रदाय हैं।

साहित्य क्या है? साहित्य किसे कहते हैं? साहित्य से आप क्या समझते हैं?

– किसी भाषाविद् द्वारा शास्त्रसम्मत विधानों  का पालन करते हुए अपने ज्ञान, अनुभव और कल्पना शक्ति के अनुसार कलात्मक शैली में सृजित कृति को साहित्य कहते हैं। सामान्यतः साहित्य का कार्य मनुष्यों में नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक दायित्वों का उत्थान करना है। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत स्तर पर लोगों के हृदय एवं मन में व्याप्त बुराईयों को दूर कर उनके अंदर उत्तम व्यवहार, उच्च विचार, मधुर वाणी, परोपकारी स्वभाव इत्यादि को स्थायी रुप से स्थापित करना है। साहित्य के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:-

(१) गद्य साहित्य –

गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण, रेखाचित्र, नाटक, डायरी, रिपोर्ताज, निबंध, लेख, फिचर, एकांकी इत्यादि विधाएं शामिल हैं।

(२) पद्य साहित्य

– पद्य साहित्य में कविता, दोहा, चौपाई, गीत, ग़ज़ल, शायरी, भजन, छंद इत्यादि शामिल हैं।

(३) चंपू साहित्य

– वह साहित्य जिसमें गद्य और पद्य दोनों तरह के साहित्य मिलें होते हैं, उसे चंपू साहित्य कहते हैं।

लेख क्या है? लेख किसे कहते हैं? लेख से आप क्या समझते हैं?

– गद्य साहित्य की वह विधा जिसमें किसी विषय विशेष का परिचय देते हुए अपना विचार और विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है, उसे लेख कहते हैं। सामान्यतः समाचारपत्रों में इसका प्रकाशन होता है।

जैन – भंडार या जैन भंडार क्या है? जैन भंडार किसे कहते हैं? जैन भंडार से आप क्या समझते हैं?

– जैन धर्म से संबंधित वह पुस्तकालय अथवा संग्रहालय जहां जैन से जुड़ी पुस्तकों, चित्रों, हस्तलिपियों को सुरक्षित तरीके से रखा जाता है, उसे जैन भंडार कहते हैं। इसका उद्देश्य आने वाले पीढ़ियों के लिए इसे धरोहर के रूप में हस्तांतरित करना है।

हस्तलिपि क्या है? हस्तलिपि किसे कहते हैं? हस्तलिपि से आप क्या समझते हैं?

– हस्तलिपि साहित्य – लेखन की एक ऐसी विधा है जिसमें व्यक्ति अपने भावों या विचारों को अपने हाथों से यत्नपूर्वक लिखा करते हैं। यह लेखन की सबसे प्राचीन विद्या है। प्राचीन काल में पत्तियों, कपड़ों आदि पर अपनी हस्तलिपि तैयार करते थे।

मातृभाषा क्या है? मातृभाषा किसे कहते हैं? मातृभाषा से आप क्या समझते हैं?

– वह भाषा जो बच्चे मां के दूध के साथ परिवार और समाज से सीखते हैं, उसे मातृभाषा कहते हैं। जैसे:- सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा आदि क्षेत्र के अधिकांश बच्चों की मातृभाषा “मैथिली” है।

एलोरा क्या है? यह क्यों प्रसिद्ध है?

– एलोरा महाराष्ट्र में स्थित एक प्राचीन शहर है। यह अपने गुफाओं और मंदिरों के कारण विश्व प्रसिद्ध है। इसका प्राचीन नाम एलापुर या वेरूल है। यह यूनेस्को के विश्व धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित है।

गणितज्ञ किसे कहते हैं?

– गणित के क्षेत्र में विद्वान व्यक्ति को गणितज्ञ कहते हैं। जैसे:- रामानुजन, महावीराचार्य आदि।

दिवेआगर ताम्रपत्र का परिचय दें।

– दिवेआगर ताम्रपत्र मराठी भाषा का सबसे प्राचीन या प्रथम ताम्रपत्र के रूप में प्रसिद्ध है। इसका समय 1060 ई. बताया जाता है। देवनागरी लिपि में लिखित इस अभिलेख में मावलभट्ट, वासुदेव भट्ट, नागरुद्र भट्ट आदि का वर्णन है। दिवेआगर स्थान के कारण इस ताम्रपत्र का नाम दिवेआगर पड़ा है।

गोमटेश्वर कौन थे?

– गोमटेश्वर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र थे। यह बाहुबली के नाम से भी जाना जाता है। इसका लगभग 18 मीटर ऊंची मूर्ति श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर अवस्थित है।

प्रशस्ति क्या है? प्रशस्ति किसे कहते हैं? प्रशस्ति से आप क्या समझते हैं? प्रशस्ति का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?

– किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा राजा – महाराजा या  अपने स्वामी की प्रशंसा में लिखित विशिष्ट अभिलेख/लेख / प्रशंसा पत्र को प्रशस्ति कहा जाता है। प्रशस्ति का शाब्दिक अर्थ स्तुति पत्र, प्रशंसा – पत्र, वीरता – वर्णन, श्रेष्ठता सूचक पत्र आदि होता है। सामान्यतः इसे प्रशस्ति पत्र के रूप में भी जाना जाता है। जैसे हमलोगों को समाचार पत्रों के माध्यम किसी विशेष व्यक्ति के बारे जानकारी मिलती है कि फलां व्यक्ति को माननीय मंत्री जी या फिर अन्य के द्वारा चादर, नकद और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

ग्वालियर प्रशस्ति क्या है? ग्वालियर प्रशस्ति किसे कहते हैं? ग्वालियर प्रशस्ति से आप क्या समझते हैं?

– प्रतीहार राजवंश के शासक मिहिर भोज के दरबारी कवि बालादित्य द्वारा लिखित वह प्रशस्ति जिसमें उनकी ऐतिहासिक उपलब्धियों, वीरता आदि का वर्णन किया गया है, उसे ग्वालियर प्रशस्ति कहते हैं। यह प्रशस्ति शिलालेख के रूप में उत्कीर्ण है जिसमें कुल 17 श्लोक हैं। इस प्रशस्ति में गुर्जर-प्रतिहारों को महाराजा दशरथ के पुत्र लक्ष्मण का वंशज बताया गया हैं।

ब्राह्मी लिपि क्या है? ब्राह्मी लिपि किसे कहते हैं? ब्राह्मी लिपि से आप क्या समझते हैं?

– वह प्राचीन लिपि जिससे देवनागरी लिपि के साथ – साथ अन्य भारतीय लिपियों का विकास हुआ है, उसे ब्राह्मी लिपि कहते हैं। इस लिपि में संस्कृत, पाली, प्राकृत भाषाएं लिखी जाती थीं। कहा जाता है कि इस लिपि में कुल 47 अक्षर थे। जहां तक लेखन की बात है तो इस लिपि में लेखन दाएं से बाएं की ओर होता था।

नागरी लिपि शीर्षक पाठ के रचनाकार गुणाकर मुले का परिचय दें।

‘नागरी लिपि’ पाठ साहित्य की कौन सी विधा है?

– निबंध

नागरी लिपि शीर्षक निबंध के लेखक या निबंधकार कौन है?

– गुणाकर मुले

नागरी लिपि शीर्षक निबंध किस पुस्तक से लिया गया है?

– नागरी लिपि शीर्षक निबंध ‘भारतीय लिपियों की कहानी’ नामक पुस्तक से लिया गया है।

गुणाकर मुले का जन्म कब और कहां हुआ था?

– गुणाकर मुले का जन्म 3 जनवरी 1935 ई. में महाराष्ट्र के अमरावती जिला के सिंधु बुजुर्ग गांव में हुआ था।

गुणाकर मुले की मराठी भाषा में कहां तक पढ़ाई हुई थी?

– गुणाकर मुले की मराठी भाषा में मिडिल स्तर तक पढ़ाई हुई थी।

गुणाकर मुले ने किस विश्वविद्यालय से और किस विषय में एमए किए?

– गुणाकर मुले ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से गणित विषय में एमए किए।

गुणाकर मुले के गुरु कौन थे? गुणाकर मुले किसके शिष्य थे?

– राहुल सांकृत्यायन

गुणाकर मुले की प्रमुख रचनाएं कौन-कौन – सी है?

– गुणाकर मुले की प्रमुख रचनाएं अक्षरों की कहानी, भारत: इतिहास और संस्कृति, प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक, आधुनिक भारत के महान वैज्ञानिक, मैंडलीफ, महान वैज्ञानिक, सौर मंडल, सूर्य, नक्षत्र – लोक, भारतीय लिपियों की कहानी, अंतरिक्ष – यात्रा, ब्रह्मांड परिचय, भारतीय विज्ञान की कहानी, अक्षर कथा आदि हैं।

गुणाकर मुले का बैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ यानि बाबा नागार्जुन के साथ कैसा संबंध था?

– गुणाकर मुले का बैद्यनाथ मिश्र ‘यात्री’ यानि बाबा नागार्जुन के साथ बहुत गहरा और रोचक संबंध था। गुणाकर मुले के विवाह के अवसर पर न्यायालय में बाबा नागार्जुन के द्वारा ही पिता के कर्तव्यों का निर्वहन किया गया था।

गुणाकर मुले का निधन कब हुआ था?

– गुणाकर मुले का निधन 16 अक्टूबर 2009 को हुआ था।

नागरी लिपि शीर्षक पाठ से संबंधित शब्द एवं उनके शब्दार्थ :-

लिपि — वर्णों या ध्वनियों के लिखित चिन्ह

सदी — शताब्दी या एक सौ वर्ष का कालखंड

टाइप — मुद्रण यन्त्र/छपाई का यंत्र

स्थिरता — ठहराव, एकरूपता

ध्वनि – आवाज, स्वर, नाद आदि

अक्षर — ध्वनि संकेत जो लेखन में प्रयुक्त होता है। जिसका क्षर अर्थात नाश नहीं होता है, उसे अक्षर कहते हैं।

तथ्य —– वास्तविकता, लिखित/प्रमाणिक साक्ष्य या उदाहरण

अनुकरण — नकल, देखा-देखी

उद्धरण — किसी धार्मिक या नैतिक सुविचार का प्रस्तुतीकरण।

ग्रंथ – धर्म अथवा न्याय संबंधित पवित्र पुस्तक ।

भिन्न — अलग, पृथक।

प्राचीन — पुराना, प्रारंभिक ।

पुत्री — बेटी , आत्मजा।

अवश्य — जरुर ।

तथ्य — वास्तविकता ।

सदैव —  हमेशा, सदा + एव (हमेशा ही)।

स्मरण — याद।

कुछ — थोड़ा ।

व्यवहार — प्रयोग, काम।

अनेक — कई।

शासक — शासनकर्ता, राजा, सम्राट ।

इस्तेमाल — प्रयोग, उपयोग, व्यवहार ।

अंकित — लिखित, चिन्हित।

अल्पकाल — सीमित समय, लघु अवधि।

नींव — आधार, बुनियाद।

पूर्वार्द्ध — किसी कालखंड के पहले वाला आधा भाग। जैसे:- ग्यारहवीं शताब्दी पूर्वार्द्ध का तात्पर्य 1001 ई. से 1050 ई. तक का कालखंड होगा। पूर्व+अर्द्ध = पूर्वार्द्ध।

उपर्युक्त — पूर्व कथित, उपरि + उक्त (ऊपर कथित)।

स्पष्ट — साफ।

अभ्यास — पुनरावृत्ति, किसी गतिविधि का बार – बार दुहराव।

अमुक — खास, विशिष्ट।

निश्चित — निर्धारित।

शुरुआत — आरंभ।

शैली — ढंग, तरीका।

मतभेद —- वैचारिक विषमता, मतभिन्नता, मतांतर।

मत — विचार, राय, धारणा।

अड़चन — बाधा।

अन्य — दूसरा।

बाकी — शेष।

सिर्फ — केवल।

प्रयुक्त — प्रयोग में लाया गया।

संकुचित — संकीर्ण, (छोटी सोच)।

दरअसल — वास्तव में, असल में।

अस्तित्व — भौतिक विद्यमानता।

अर्थात — यानि।

असंभव — जो संभव नहीं हो, नामुमकिन।

सप्रमाण — प्रमाण सहित।

सदी — शताब्दी, सौ साल का कालखंड।

झंझट — उलझन, जटिलता।

व्याप्त — फैला हुआ, विस्तृत।

सार्वदेशिक — वैश्विक, सम्पूर्ण देश का।

प्रादेशिक — क्षेत्रीय, स्थानीय।

आद्यलेख —- अत्यंत प्राचीन।

सुदूर — बहुत भीतर स्थित, बहुत दूर स्थित।

विद्यानुराग —- विद्या से प्रेम।

संक्षिप्त — लघु, छोटा।

चर्चा — विचार – विमर्श ।

॥ समाप्त॥

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